समान काम-समान वेतन के लिए ‘आर-पार’ की जंग: छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षक करेंगे जल सत्याग्रह और अर्धनग्न प्रदर्शन, 5 जुलाई को शिक्षा मंत्री का बंगला घेरने की तैयारी
दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत अतिथि शिक्षकों का आक्रोश अब फूट पड़ा है। नियमितीकरण और ‘समान काम, समान वेतन’ जैसी गंभीर मांगों को लेकर प्रांतीय अतिथि शिक्षक कल्याण संघ ने दुर्ग में एक विशाल रैली निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया। संघ ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे राजधानी रायपुर की सड़कों पर जल सत्याग्रह और अर्धनग्न प्रदर्शन जैसे उग्र कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
संघ के इस एलान के बाद प्रदेश की कमान संभाल रहे प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
नियमित शिक्षकों के बराबर काम, फिर भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
प्रांतीय अतिथि शिक्षक कल्याण संघ के प्रतिनिधि धर्मेंद्र वैष्णव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेशभर के शासकीय स्कूलों में 1650 राज्य अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये शिक्षक नियमित शिक्षकों के कंधे से कंधा मिलाकर निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करते हैं:
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नियमित कक्षा अध्यापन और शिक्षण कार्य।
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छात्रों को आईसीटी (ICT) कंप्यूटर प्रशिक्षण देना।
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राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रभारी के रूप में दायित्व निभाना।
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चुनाव कार्य, छात्रवृत्ति संबंधी कार्य और बोर्ड परीक्षाओं का पर्यवेक्षण व मूल्यांकन।
अतिथि शिक्षकों का दर्द है कि इतनी महत्वपूर्ण सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है, न ही अवकाश और सेवा सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसी भेदभाव के खिलाफ अब शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है।
आंदोलन का पूरा शेड्यूल: राजधानी में दिखेगा बड़ा विरोध
नाराज अतिथि शिक्षकों ने अपनी 4 सूत्रीय मांगों को मनवाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा जारी कर दी है:
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5 जुलाई: अपनी लंबित मांगों को लेकर रायपुर में शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव करेंगे।
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12 जुलाई: शासन का ध्यान खींचने के लिए राजधानी रायपुर में ‘जल सत्याग्रह’ किया जाएगा।
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14 जुलाई: मांगें पूरी न होने पर अतिथि शिक्षक राजधानी की सड़कों पर ‘अर्धनग्न प्रदर्शन’ कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
अतिथि शिक्षकों की 4 प्रमुख मांगें:
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विभाग में संविलयन: राज्य के सभी 1650 अतिथि शिक्षकों का तत्काल स्कूल शिक्षा विभाग में संविलयन किया जाए।
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मई-जून का मानदेय: ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) की अवधि का भी नियमित रूप से मानदेय प्रदान किया जाए।
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समान वेतनमान: ‘समान कार्य, समान वेतन’ के सिद्धांत के तहत व्याख्याता (Lecturer) पद के समकक्ष वेतनमान निर्धारित हो।
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शासकीय अवकाश: सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर अतिथि शिक्षकों को भी आकस्मिक और अन्य अवकाशों की पात्रता मिले।
बढ़ सकती है शासन की मुश्किलें:
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही स्कूलों की कमान संभालने वाले अतिथि शिक्षकों का यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। यदि 5 जुलाई से शुरू हो रहा यह आंदोलन लंबा खिंचता है, तो प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

