भारत के एविएशन सेक्टर में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल हवाई सफर की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। देश की पहली विशेष सीप्लेन ऑपरेटर कंपनी स्काईहॉप एविएशन (SkyHop Aviation) ने नॉर्वे की विमान निर्माता कंपनी नोएमी एयरोस्पेस (NOEMI Aerospace) के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत भारत और पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों में प्रदूषण-मुक्त ‘इलेक्ट्रिक सीप्लेन’ (पानी और जमीन दोनों से उड़ान भरने में सक्षम विमान) सेवा शुरू की जाएगी।
नोएमी (NOEMI – नो एमिशन) पूरी तरह से शून्य प्रदूषण वाली हरित हवाई यात्रा तकनीकों के विकास के लिए जानी जाती है।
साल 2030 तक 40 विमानों का बेड़ा
स्काईहॉप एविएशन ने 2030 तक 40 विमानों का एक मजबूत बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। सरकारी मंजूरियां मिलने के बाद कुल बेड़े का 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड विमानों का होगा। इसके तहत कंपनी नोएमी से शुरुआती 10 इलेक्ट्रिक विमान खरीदेगी या लीज पर लेगी, जिसके बाद 5 अतिरिक्त विमान जोड़ने का विकल्प भी खुला रहेगा।
पहले चरण में लक्षद्वीप कनेक्टिविटी पर जोर
पहले चरण में लक्षद्वीप के द्वीपों को आपस में और उन्हें भारतीय मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए 19 सीटों वाले पारंपरिक ‘ट्विन-ऑटर’ सीप्लेन का इस्तेमाल किया जाएगा।आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार होते ही इन रूट्स पर नोएमी के इलेक्ट्रिक विमान उतारे जाएंगे। कंपनी उन तटीय इलाकों, नदियों और झीलों वाले क्षेत्रों की पहचान कर रही है जहां पारंपरिक रनवे बनाना मुश्किल और महंगा है।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल हब बनने की योजना
यह साझेदारी केवल विमान संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों कंपनियां भविष्य में भारत के भीतर ही इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड सीप्लेन के निर्माण और असेंबलिंग पर काम करेंगी।
स्काईहॉप एविएशन की संस्थापक व सीईओ अवनी सिंह के अनुसार, भारत की लंबी तटरेखा और द्वीपों के लिए सीप्लेन गेम-चेंजर साबित होंगे और उनका उद्देश्य भारत को इस उद्योग का ग्लोबल हब बनाना है। वहीं, नोएमी एयरोस्पेस के सीईओ एरिक लिथुन ने भारत सरकार के नए सीप्लेन रूट विस्तार कार्यक्रमों को अपनी तकनीक के लिए बेहद उपयुक्त बताया।























