छत्तीसगढ़ में पिछले चार वर्षों के दौरान मदिरा (शराब) की बिक्री से होने वाले राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 के वर्तमान डेटा तक प्रदेश सरकार को शराब की बिक्री से कुल 41,185 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, साल-दर-साल शराब की बिक्री से होने वाली कमाई का ग्राफ लगातार ऊपर गया है, जो राज्य की आर्थिकी में आबकारी विभाग के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है। साल 2022-23 में जहाँ कुल आय लगभग 8,838 करोड़ रुपये थी, वहीं साल 2024-25 में यह बढ़कर 12,187 करोड़ रुपये तक पहुँच गई।
बिक्री के मामले में राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं। अकेले रायपुर जिले से हर साल औसतन 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है और वर्ष 2024-25 में रायपुर से सबसे अधिक 2,497 करोड़ रुपये की शराब बिकी। भिलाई-दुर्ग क्षेत्र भी पीछे नहीं है, जहाँ से 2024-25 में करीब 1,498 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि बिलासपुर में भी शराब की खपत तेजी से बढ़ी है और वहां 2024-25 में राजस्व का आंकड़ा 1,079 करोड़ रुपये रहा। राजनांदगांव जिले में भी साल 2024-25 के दौरान लगभग 585 करोड़ रुपये की शराब की खपत दर्ज की गई है।
छत्तीसगढ़ में देशी और विदेशी दोनों ही प्रकार की शराब के शौकीन बड़ी संख्या में हैं, हालांकि हाल के वर्षों में विदेशी मदिरा और प्रीमियम ब्रांड्स के प्रति रुझान तेजी से बढ़ा है। साल 2024-25 के दौरान विदेशी मदिरा से 3,524 करोड़ रुपये और देशी मदिरा से 3,145 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। प्रीमियम सेगमेंट की बात करें तो हाई-एंड ब्रांड्स से होने वाली आय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, जो 2022-23 के 371 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 535 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। आंकड़ों में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि मोहला-मानपुर, खैरागढ़ और सारंगढ़ जैसे नवगठित जिलों में, जहाँ 2022-23 में राजस्व नगण्य था, अब वहाँ से भी सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।


