भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘स्थानीय सरकार’ राज्य का विषय है, इसी कारण पंचायतों की स्थापना और उनका संचालन राज्यों के अपने विशिष्ट पंचायती राज अधिनियमों के तहत किया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 243छ राज्य विधानमंडलों को यह अधिकार देता है कि वे पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं तैयार करने के लिए आवश्यक शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपें। राज्यों को शक्तियों के इस हस्तांतरण के लिए ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर विचार करना होता है, हालांकि यह प्रक्रिया और संसाधनों का आवंटन अलग-अलग राज्यों में वहां की नीतियों के अनुसार भिन्न हो सकता है।
पंचायती राज मंत्रालय समय-समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और क्षेत्रीय दौरों के माध्यम से पंचायतों के कामकाज की समीक्षा करता रहता है। इसी कड़ी में, मंत्रालय ने फरवरी 2025 में एक रिपोर्ट जारी की है, जो 2024 के आंकड़ों के आधार पर राज्यों में पंचायतों को दी गई शक्तियों का आकलन करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013-14 से 2021-22 के बीच अंतरण सूचकांक (Devolution Index) 39.9% से बढ़कर 43.9% हो गया है, जो स्थानीय शासन की मजबूती को दर्शाता है।
पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने ‘ई-ग्रामस्वराज’ जैसा उपयोगकर्ता के अनुकूल वेब पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी विकास योजनाएं तैयार कर ऑनलाइन अपलोड करती हैं। वित्तीय प्रबंधन को सख्त बनाने के लिए इस पोर्टल को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) से जोड़ा गया है, ताकि धनराशि का हस्तांतरण और सेवा प्रदाताओं को भुगतान वास्तविक समय पर सीधे किया जा सके। साथ ही, पंचायतों में होने वाली खरीदारी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) के साथ भी एकीकृत किया गया है।
सरकार राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के माध्यम से पंचायतों के डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। इस योजना के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी शासन क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है और ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण के साथ-साथ कंप्यूटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। अभी तक देश भर में 13,848 पंचायत भवनों और 65,345 कंप्यूटरों के वितरण को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अंत में, पंचायतों के खातों की पारदर्शी ऑडिटिंग के लिए ‘ऑडिटऑनलाइन’ एप्लीकेशन विकसित की गई है, जो केंद्रीय वित्त आयोग के धन के सही उपयोग की पुष्टि करती है। इसी तरह, ग्राम सभाओं के संचालन और प्रबंधन में सुधार लाने के लिए ‘निर्णय’ (NIRNAY) नामक ऑनलाइन एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा है। यह पूरी जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने 04 फरवरी 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान साझा की है।
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