नई दिल्ली: आम जनता की रसोई के बजट पर महंगाई का नया झटका लगा है। बासमती से लेकर रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले नॉन-बासमती चावल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। चालू वित्त वर्ष (FY27) की पहली तिमाही में बासमती चावल के दाम बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं, जबकि नॉन-बासमती किस्मों में 20 से 25 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी हुई है।
व्यापारियों और बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक अक्टूबर-नवंबर में नई खरीफ फसल मंडियों में नहीं पहुंचती, तब तक कीमतों में नरमी की उम्मीद कम है।
बाजार में क्यों बढ़ी चावल की कीमतें?
कीमतों में इस उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात और घरेलू आपूर्ति संकट दोनों जिम्मेदार हैं:अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कई देश फूड सिक्योरिटी को लेकर सतर्क हो गए हैं। खाड़ी (गल्फ) देशों की ओर से भारतीय चावल की बड़े पैमाने पर खरीद की जा रही है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में मॉनसून की बेरुखी से पैदावार और स्थानीय आवक प्रभावित हुई है।राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव के अनुसार, तेलंगाना सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए की जा रही भारी खरीद से खुले बाजार में गैर-बासमती चावल की उपलब्धता काफी कम हो गई है।
किस्मवार कीमतों में कितना आया उछाल?
राइसविला ग्रुप के अनुसार, खुदरा बाजार में विभिन्न किस्मों के दाम इस प्रकार बढ़े हैं:
| चावल की किस्म | पहले की कीमत (प्रति किग्रा) | वर्तमान कीमत (प्रति किग्रा) |
| बासमती (बिरयानी राइस) | ₹85 | ₹100 |
| सोना मसूरी (Sona Masoori) | ₹51 – ₹52 | ₹63 – ₹64 |
क्या केवल निर्यात है तेजी की वजह?
केआरबीएल लिमिटेड के बल्क राइस एक्सपोर्ट्स हेड अक्षय गुप्ता के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 154 देशों को रिकॉर्ड 65.2 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया, जिसमें सऊदी अरब सबसे बड़ा आयातक रहा।हालांकि, जानकारों का स्पष्ट कहना है कि केवल निर्यात ही कीमतों में तेजी की वजह नहीं है। वर्ष 2025 की घरेलू फसल का स्टॉक तेजी से समाप्त हो चुका है और नई आवक से पहले मंडियों में बफर स्टॉक बेहद सीमित बचा है। स्टॉक की यही कमी कीमतों में उछाल की मुख्य वजह बनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर-नवंबर में खरीफ की नई फसल मंडियों में आने और अंतरराष्ट्रीय तनाव में कमी आने के बाद ही खुदरा कीमतों में स्थिरता देखने को मिलेगी।























