नई दिल्ली: सृष्टि के पहले शिल्पकार, निर्माण और तकनीकी कला के देव भगवान विश्वकर्मा की जयंती 17 सितंबर 2026, गुरुवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। हर वर्ष सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश (कन्या संक्रांति) के अवसर पर यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन औद्योगिक संस्थानों, कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और तकनीकी उपकरणों की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना करने से कारोबार में उन्नति, आर्थिक समृद्धि और कार्यक्षेत्र में निर्बाध सफलता प्राप्त होती है।
विश्वकर्मा पूजा 2026: शुभ मुहूर्त और संक्रांति काल
वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं:
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कन्या संक्रांति पुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से दोपहर 02:31 बजे तक।
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक (अत्यंत श्रेष्ठ समय)।
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अन्य शुभ समय:
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पहला मुहूर्त: सुबह 07:58 बजे से।
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दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक।
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तीसरा (शाम का) मुहूर्त: शाम 04:52 बजे से 06:24 बजे तक।
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17 सितंबर 2026: दिन का चौघड़िया मुहूर्त
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शुभ: सुबह 06:06 से 07:39 बजे तक
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रोग (अशुभ): सुबह 07:39 से 09:11 बजे तक
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उद्वेग (अशुभ): सुबह 09:11 से 10:43 बजे तक
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चर (सामान्य): सुबह 10:43 से दोपहर 12:15 बजे तक
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लाभ (शुभ): दोपहर 12:15 से 01:47 बजे तक
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अमृत (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 01:47 से 03:19 बजे तक
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काल (अशुभ): दोपहर 03:19 से 04:51 बजे तक
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शुभ: शाम 04:51 से 06:24 बजे तक
पूजन सामग्री की सूची
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र, लकड़ी की चौकी, पीला या लाल कपड़ा, कलश, गंगाजल, जनेऊ, हल्दी, रोली, अक्षत (चावल), सुपारी, मौली (कलावा), लौंग, इलायची, कपूर, देसी घी का दीपक, फल, फूल, मिठाई, इत्र और शहद।
सरल पूजन विधि
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तैयारी: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपने कार्यस्थल, औजारों, मशीनों तथा पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
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प्रतिमा स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
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संकल्प व अभिषेक: भगवान का ध्यान करते हुए गंगाजल से प्रतीकात्मक जलाभिषेक करें और देसी घी का दीपक व धूप प्रज्वलित करें।
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श्रृंगार व अर्पण: भगवान को रोली, हल्दी, अक्षत, जनेऊ, फूल, फल, मिष्ठान और इत्र अर्पित करें।
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यंत्र व औजार पूजन: अपने कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले सभी औजारों, लैपटॉप/कंप्यूटर, वाहनों और भारी मशीनों पर रोली-तिलक लगाकर अक्षत व फूल चढ़ाएं।
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आरती व प्रार्थना: अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और अपने कारोबार व आजीविका में उन्नति तथा सुरक्षा की कामना करें।























