गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ पुलिस का सम्मान, 10 जांबाज अफसरों को मिलेगा राष्ट्रपति मेडल
फैज़ान अशरफ
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए एक गौरवशाली खबर आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के 10 पुलिस अधिकारियों को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस (MSM) देने की घोषणा की है, जिनमें रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह का नाम प्रमुखता से शामिल है।
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बिहार के बक्सर जिले के छोटे से गांव ‘दुल्लहपुर’ से निकले शशि मोहन सिंह की यात्रा बेहद प्रेरणादायक है।उन्होंने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (MA)।कर एक लेक्चरर के रूप में समाज को ज्ञान देने से शुरुआत की।1996 में PSC उत्तीर्ण कर DSP बने। उनके लिए वर्दी केवल एक पद नहीं, बल्कि समाज सुधार का एक ‘मिशन’ है।
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जशपुर में ‘सिंघम’ अवतार
रायगढ़ आने से पहले जशपुर में उनके कार्यकाल को ‘स्वर्ण काल’ के रूप में याद किया जाता है। उनके नेतृत्व में पुलिसिंग के नए मानक स्थापित हुए. यहाँ उनका शानदार स्ट्राइक रेट रहा. वर्ष 2025 में 2386 प्रकरणों में से 2162 का निराकरण (92% सफलता दर)।
नशे पर ‘आघात’: ₹4 करोड़ की अवैध शराब और ₹2 करोड़ का गांजा जब्त कर तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया।छत्तीसगढ़ में पहली बार गांजा तस्करों की ₹1.88 करोड़ की संपत्ति कुर्क की।
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दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों से तस्करी की गई बेटियों को सुरक्षित वापस लाए। उन्होंने मानव तस्करी के दर्द पर आधारित फिल्म “कजरी” के माध्यम से जागरूकता फैलाई। वे खुद एक बेहतरीन अभिनेता और कवि भी हैं।
ऑपरेशन शंखनाद: गौ-तस्करी के खिलाफ अभियान चलाकर 1500 से अधिक गौवंश की रक्षा की।जशपुर में ₹150 करोड़ की अंतरराज्यीय ठगी का पर्दाफाश करने के बाद, अब शशि मोहन सिंह रायगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना और जनता में खाकी के प्रति विश्वास जगाना ही उनकी कार्यशैली की पहचान है।
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शशि मोहन सिंह (SSP) का मानना है ”अपराधियों के लिए कानून का खौफ और आम जनता के लिए खाकी का साथ—यही मेरी पुलिसिंग का मूलमंत्र है।”
शशि मोहन सिंह जैसे अधिकारी यह सिद्ध करते हैं कि जब संकल्प और वर्दी एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव निश्चित है। उन्हें मिलने वाला यह पदक उनके अटूट साहस और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है।
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