लेखक: फैज़ान अशरफ़ |
छायांकन: आकाश सोनी
छत्तीसगढ़ का ‘छोटा नागपुर’ कहा जाने वाला जशपुर इन दिनों प्रकृति के सबसे खूबसूरत श्रृंगार से सराबोर है। जैसे ही मानसून ने अपनी पहली फुहारों के साथ यहाँ की पहाड़ियों को छुआ है, पूरा इलाका किसी स्वर्गिक दृश्य में बदल गया है। जशपुर के मानसून की ये तस्वीरें और भावनाएं उन लोगों के लिए एक खुला निमंत्रण है, जो कंक्रीट के जंगलों और मशीनी जिंदगी से दूर कुछ पल इत्मीनान से जीना चाहते हैं।
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अक्सर लोग अपनी छुट्टियों के लिए भारी-भरकम बजट बनाकर दूर-दराज के महंगे हिल स्टेशनों की ओर रुख करते हैं, लेकिन जशपुर के निवासियों के लिए यहाँ की सुंदरता किसी ‘नोन-भात’ की तरह सहज और सुलभ है। यहाँ के स्थानीय लोग मानते हैं कि जो लोग जशपुर को नहीं जानते, उन्होंने अभी तक मानसून का असली रूहानी अनुभव नहीं किया है। यहाँ की हरियाली और धुंध भरी वादियां किसी भी बड़े बजट वाली ट्रिप से कहीं ज्यादा रूह को सुकून देने वाली हैं।
दमेरा, किनकेल और सोगड़ा—ये केवल नाम नहीं हैं, बल्कि जशपुर के निवासियों के लिए एक ‘इमोशनल सपोर्ट सिस्टम’ बन गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जशपुर की ये वादियाँ हर तरह के मानसिक तनाव का इलाज हैं। चाहे घर की छोटी-मोटी कलह हो, दफ्तर का दबाव हो, अपनों के साथ वक्त बिताना हो या फिर बस खुद के साथ एकांत में बैठकर जिंदगी की उलझनों को सुलझाना हो, यहाँ की ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदें हर मर्ज की दवा साबित होती हैं। यहाँ की आबोहवा इतनी जादुई है कि यह हर तरह के मूड और स्थिति को अपने आगोश में लेकर शांत कर देती है।
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अभी तो मानसून ने बस अपनी पहली दस्तक ही दी है। आने वाले हफ्तों में यहाँ के झरने अपने पूरे शबाब पर होंगे, पहाड़ बादलों की मोटी चादर ओढ़ लेंगे और सड़कों के किनारे का नज़ारा किसी फिल्म के खूबसूरत सीन जैसा हो जाएगा। जशपुर के पर्यटन प्रेमी इस बात को लेकर बेहद उत्साहित हैं कि आने वाले दिनों में यह इलाका और भी ज्यादा मनमोहक होने वाला है। जो लोग शहर की भीड़-भाड़ और शोर-शराबे से दूर बैठे हैं, उनके लिए जशपुर का यह मानसून एक ऐसा अनुभव हो सकता है जो उन्हें अंदर तक झकझोर दे और एक नई ऊर्जा से भर दे।
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यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू और पहाड़ों से टकराते हुए बादल शहर की थकान को पल भर में धो देने की ताकत रखते हैं। यदि आप शांति की तलाश में हैं, तो जशपुर की ये वादियाँ आपका इंतजार कर रही हैं। अपनी रफ़्तार को थोड़ा धीमा करें और इस मानसून जशपुर के नज़ारों में खो जाने का अनुभव जरूर लें, क्योंकि घूमते रहना और मस्त रहना ही जीवन का असली फलसफा है।
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