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विशेष ब्यूरो रिपोर्ट | 2026 महाशिवरात्रि
मध्य भारत/पूर्वी भारत: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक संगम बनने जा रहा है। झारखंड के देवघर से लेकर मध्य प्रदेश के उज्जैन तक, और छत्तीसगढ़ के प्राचीन भोरमदेव से लेकर ओडिशा के तटों तक, चारों राज्यों में ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष गूँज रहा है। भोले भक्तों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं है।
चार राज्यों का अद्भुत आध्यात्मिक सफर:
झारखंड का बाबा धाम
देवघर के रावनेश्वर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में लाखों की संख्या में कांवरिये जल अर्पित करने पहुँच रहे हैं। यहाँ की ‘शिव बारात’ इस बार और भी भव्य होने वाली है।
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ओडिशा का लिंगराज वैभव
भुवनेश्वर के प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर में महाशिवरात्रि पर जलने वाला ‘महादीप’ देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु जुट रहे हैं। पुरी के लोकनाथ मंदिर में भी विशेष पूजा की तैयारी है।
मध्य प्रदेश में महाकाल की गूँज
उज्जैन के महाकालेश्वर में ‘शिव नवरात्रि’ का समापन महाशिवरात्रि पर बाबा के विशेष श्रृंगार और भस्म आरती के साथ होगा। वहीं ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
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छत्तीसगढ़ का भोरमदेव और राजिम
कवर्धा के भोरमदेव मंदिर में जहाँ विशेष नक्काशी और प्राचीन परंपराओं के साथ पूजा होगी, वहीं राजिम के पुन्नी मेले में संगम तट पर आस्था की डुबकी लगेगी।
जशपुर के अंचलों में भारी उत्साह
स्थानीय स्तर पर, जशपुर जिले के कैलाश गुफा, किलकिलेश्वर महादेव,भीमाशंकर महादेव और कोतेबिरा धाम, क़े अलावा सभी शिव मंदिरों में भी विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भक्तों के लिए जगह-जगह भंडारे और विश्राम की व्यवस्था की गई है।
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“यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था का वह सेतु है जो झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को एक अटूट धागे में पिरोता है।”
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भारी भीड़ को देखते हुए चारों राज्यों के पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है और भक्तों की सुविधा के लिए विशेष ‘शिव दर्शन’ हेल्पलाइन भी जारी की गई है।

