रायपुर: छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सा उपकरणों और दवाइयों की खरीदी में हुई कथित वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर विधानसभा में गूंजा है। विधायक बालेश्वर साहू द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में लोक स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गंभीर कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने सदन को बताया कि कोविड-19 के दौरान हुई खरीदी में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच चिकित्सा शिक्षा संचालनालय स्तर पर गठित समिति द्वारा की गई थी। इस जांच समिति द्वारा सितंबर 2022 में सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त संचालक (चिकित्सा शिक्षा) को “वित्तीय अनियमितता” के गंभीर आरोपों में निलंबित कर दिया गया था।
सदन में जानकारी दी गई कि निलंबित अपचारी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच की प्रक्रिया वर्तमान में गतिशील है। राज्य शासन के नियमों के अनुसार विभागीय जांच पूर्ण करने की अधिकतम अवधि एक वर्ष निर्धारित है और पूरी कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत की जा रही है। मंत्री ने स्वीकार किया कि जांच प्रतिवेदन में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद ही निलंबन की कार्रवाई की गई थी और अब संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के माध्यम से आगे की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस मामले ने एक बार फिर आपदा के समय हुए सरकारी खर्चों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।



