छत्तीसगढ़ विधानसभा: गृह, पंचायत, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के मुद्दों पर मंत्रियों से सवाल पूछेंगे विधायक, ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’, फोर्टिफाइड चावल और केंद्र की राशि में गड़बड़ी का उठेगा मुद्दा

रायपुर/CG Now:

छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के सरकारी दावों के बीच विधानसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में गुमशुदगी के मामलों में जिस तरह से निरंतर बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, वह न केवल कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है बल्कि सामाजिक सुरक्षा की पोल भी खोलती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 से लेकर जनवरी 2026 के शुरुआती दिनों तक प्रदेश भर से कुल 35,662 महिलाएं और 10,757 बालिकाएं रहस्यमयी ढंग से गायब हुई हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।

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आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह डराने वाली सच्चाई सामने आती है कि प्रदेश की राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर इस वक्त गुमशुदगी के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। अकेले रायपुर जिले में पिछले तीन वर्षों के भीतर 5,481 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज की गई है, जबकि बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में भी यह आंकड़ा हजारों में पहुँच चुका है। बालिकाओं की सुरक्षा के मामले में भी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहाँ रायपुर में 1,336 और बिलासपुर में 1,086 किशोरियां लापता हुई हैं। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि शहरी क्षेत्रों में सक्रिय गिरोह या अन्य आपराधिक तत्व आधी आबादी को अपना निशाना बना रहे हैं।

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चिंता की बात यह भी है कि गुमशुदगी का यह ग्राफ साल-दर-साल नीचे गिरने के बजाय ऊपर चढ़ता जा रहा है। जहाँ वर्ष 2023 में 10,619 महिलाओं के लापता होने की सूचना थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 12,888 तक पहुँच गई। केवल जनवरी 2026 के एक महीने के भीतर ही 1,227 महिलाओं और 383 बालिकाओं के गायब होने की खबर ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बस्तर, जशपुर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य अंचलों में भी सैकड़ों महिलाएं लापता हैं, जो मानव तस्करी की आशंकाओं को और अधिक पुख्ता करता है।

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हालांकि पुलिस विभाग द्वारा गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश के लिए अभियान चलाने की बात कही जाती है, लेकिन फरवरी 2026 की स्थिति में हजारों परिवारों का अपनी बेटियों और बहुओं के लिए इंतज़ार करना यह बताता है कि ‘रिकवरी रेट’ अब भी संतोषजनक नहीं है। विधानसभा में पेश यह ‘महायोग’ चीख-चीख कर शासन और प्रशासन से सवाल पूछ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रदेश की बेटियाँ कहाँ जा रही हैं और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए धरातल पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।


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