प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत भारतीय रेलवे देश के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए एक विशाल विस्तार योजना पर काम कर रही है। समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकीकरण को प्राथमिकता देते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 100 नई रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह निवेश पिछले वर्ष की तुलना में 110 प्रतिशत से भी अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाता है, जिसके तहत रिकॉर्ड 6,000 किलोमीटर लंबे रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य न केवल रेल लाइनों की लंबाई बढ़ाना है, बल्कि भीड़भाड़ वाले मार्गों को सुव्यवस्थित कर ट्रेनों की परिचालन दक्षता और समयपालन में सुधार करना भी है।
इस विस्तार योजना का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ और देश के दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों को समर्पित है। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और यात्री आवागमन को मजबूती देने के लिए खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा के बीच लगभग 8,740 करोड़ रुपये की लागत से 278 किलोमीटर लंबी पांचवीं और छठी लाइन के निर्माण को स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही, रावघाट-जगदलपुर जैसी महत्वपूर्ण रेल लाइनों के माध्यम से बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वहां के निवासियों को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर सुलभ हो सकें।
आर्थिक दृष्टि से यह निवेश भारत की अगली बड़ी छलांग का मार्ग प्रशस्त करेगा। ‘मिशन 3000 मीट्रिक टन’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, इन परियोजनाओं से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कोयला व खनिजों की आवाजाही में तेजी आएगी। महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर रेल कॉरिडोर के उन्नयन से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और स्टील व सीमेंट जैसे मुख्य उद्योगों में मांग बढ़ेगी। यह महा-परियोजना न केवल यात्रा के समय को कम करेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर देश के सबसे गरीब और अंतिम छोर पर बैठे नागरिकों की सेवा करने के भारतीय रेल के संकल्प को भी सिद्ध करेगी।


