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जशपुर। गुरुवार की वह सुबह गम्हरिया के लोगों के लिए रोज की तरह ही सुकून भरी शुरुआत लेकर आई थी। ताजी हवा और हल्की धुंध के बीच लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, लेकिन किसी को नहीं पता था कि राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर काल (मृत्यु) एक पिकअप की शक्ल में उनका इंतजार कर रहा है।
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सुबह के करीब 6 बजे थे। लकड़ा मिस्त्री और हिरा मिस्त्री—जिनके हाथों ने न जाने कितनी खराब गाड़ियों को रफ्तार दी थी—सड़क किनारे पैदल अपनी सेहत बनाने निकले थे। तभी पीछे से मौत बनकर आई एक तेज रफ्तार पिकअप ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया। रफ्तार का आलम यह था कि टक्कर लगते ही दोनों की सांसें मौके पर ही थम गईं और एक अन्य साथी लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा।
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सन्नाटे को चीरती चीखें और भागता हत्यारा
हादसे के बाद का मंजर इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई। लोहे को जोड़ने वाले मिस्त्रियों का शरीर सड़क पर बेजान पड़ा था। मानवता को शर्मसार करते हुए, आरोपी चालक ने घायल की मदद करने के बजाय एक्सीलेटर पर पैर दबाया और वहां से रफूचक्कर हो गया। चीख-पुकार सुनकर जब तक बस्ती के लोग मौके पर दौड़ते, तब तक सड़क पर केवल खून के निशान और सिसकियां बाकी थीं।
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इंसाफ की मांग: सड़कों पर आक्रोश
जैसे ही यह खबर फैली, पूरे गम्हरिया क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया और फिर उपजा एक गहरा आक्रोश। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है, लेकिन ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल है— आखिर कब तक आम आदमी इन रफ़्तार के सौदागरों का शिकार बनता रहेगा? पुलिस की घेराबंदी सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। चश्मदीदों के बयान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की विशेष टीमें अज्ञात पिकअप और उसके फरार चालक की तलाश में दबिश दे रही हैं। प्रशासन का दावा है कि अपराधी जल्द सलाखों के पीछे होगा, लेकिन उन परिवारों का क्या, जिनके घर के चिराग इस हादसे ने हमेशा के लिए बुझा दिए?

