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नई दिल्ली: भारत सरकार देश में एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई को अधिक सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद बनाने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने देश भर में बड़े पैमाने पर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने की पहल शुरू की है। इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य साल 2030 तक सड़कों पर दौड़ने वाले थोक एलपीजी टैंकरों को पूरी तरह से हटाकर सप्लाई को पाइपलाइन पर शिफ्ट करना है।
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12,500 करोड़ का निवेश और 4 प्रमुख रूट्स
इस महा-परियोजना के तहत कुल 9 पाइपलाइन रूट की पहचान की गई है। शुरुआती चरण में PNGRB लगभग 2,500 किलोमीटर लंबी चार मुख्य पाइपलाइनों के लिए बोली प्रक्रिया (Bidding) पूरी कर रहा है। इन परियोजनाओं में करीब 12,500 करोड़ रुपये का निवेश आने का अनुमान है।
ये हैं चार मुख्य रूट:
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चेरलापल्ली – नागपुर
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शिक्रापुर – हुबली – गोवा
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पारादीप – रायपुर (छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए महत्वपूर्ण)
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झांसी – सितारगंज
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आम आदमी को क्या होगा फायदा?
वर्तमान में रिफाइनरियों से बॉटलिंग प्लांट तक गैस पहुंचाने के लिए हजारों ट्रक टैंकरों का उपयोग होता है, जो महंगा और जोखिम भरा है।पाइपलाइन के जरिए परिवहन अन्य साधनों के मुकाबले काफी किफायती है, जिसका दीर्घकालिक लाभ उपभोक्ताओं को मिल सकता है। संकट या हड़ताल के समय भी पाइपलाइन में जमा गैस ‘स्टोरेज’ की तरह काम करेगी, जिससे घरों में गैस की किल्लत नहीं होगी।
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सुरक्षा और पर्यावरण के लिए वरदान
सड़कों से भारी गैस टैंकरों के हटने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, ट्रांजिट (रास्ते) के दौरान होने वाले गैस के नुकसान में कमी आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों (Climate Goals) को प्राप्त करने में मदद करेगा।
PNGRB का विजन: सुरक्षित और टिकाऊ भारत
नियामक बोर्ड (PNGRB) ने स्पष्ट किया है कि भारत की बढ़ती एलपीजी खपत को देखते हुए बंदरगाहों और रिफाइनरियों को सीधे बॉटलिंग प्लांट से जोड़ना अनिवार्य है। 2030 तक सड़क परिवहन से पूरी तरह मुक्ति पाने का यह लक्ष्य न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगा।

