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नई दिल्ली।

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो सतर्क हो जाइए। बिना टैक्स ऑडिट वाले व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। समय पर आईटीआर दाखिल करने से न केवल आपका टैक्स रिकॉर्ड दुरुस्त रहता है, बल्कि कटे हुए अतिरिक्त टैक्स का रिफंड भी जल्द मिल जाता है और आप भारी पेनल्टी से बच जाते हैं।

आयकर विभाग के अनुसार, यदि आपकी आय व्यापार या प्रोफेशन (ITR-3 या ITR-4) से है और टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं है, तो ऐसे करदाताओं के लिए डेडलाइन 31 अगस्त 2026 तय की गई है।

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आखिर क्या होता है ITR?

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) एक आधिकारिक फॉर्म होता है, जिसके माध्यम से करदाता आयकर विभाग को अपनी सालाना आय, कुल खर्च, निवेश और काटे गए टैक्स (TDS) का पूरा विवरण देता है। यदि साल के दौरान आपका टैक्स जरूरत से ज्यादा कट गया है, तो आईटीआर भरने के बाद ही वह पैसा बैंक खाते में रिफंड के रूप में वापस आता है।

31 जुलाई की डेडलाइन किनके लिए है?

  • वेतनभोगी (सैलरीड) कर्मचारी

  • पेंशनभोगी

  • छात्र एवं अन्य व्यक्तिगत करदाता (जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है)

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किन लोगों के लिए ITR भरना अनिवार्य है?

यदि आपकी आय कर-योग्य सीमा से कम भी है, तब भी निम्नलिखित स्थितियों में आईटीआर भरना अनिवार्य है:

  1. भारत या विदेश में कोई मकान, जमीन या अचल संपत्ति होने पर।

  2. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या ईएसओपी (ESOP) में निवेश करने पर।

  3. बैंक खातों में तय सीमा से अधिक नकद जमा कराने पर।

  4. सालाना बिजली बिल ₹1 लाख से अधिक आने पर।

  5. विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक खर्च करने पर।

  6. व्यापार का सालाना टर्नओवर ₹60 लाख से अधिक होने पर।

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रिटर्न भरने से पहले तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

ऐन वक्त पर होने वाली हड़बड़ी और गलतियों से बचने के लिए ये दस्तावेज अपने पास रखें:

  • फॉर्म 16 (कंपनी से प्राप्त)

  • फॉर्म 26AS, AIS (वार्षिक सूचना विवरण) और TIS (करदाता जानकारी सारांश): इन्हें आयकर विभाग के पोर्टल से डाउनलोड करें।

  • बैंक और डिमैट विवरण: बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाण पत्र, शेयर व म्यूचुअल फंड के लेन-देन के कागज।

  • कर बचत एवं कटौती के प्रमाण: धारा 80C, 80D, होम लोन या किराये के दस्तावेज।

  • पहचान व बैंक खाता: पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते की सटीक जानकारी।

विशेष सलाह: केवल फॉर्म-16 के भरोसे रिटर्न न भरें। फॉर्म 26AS, AIS और TIS से अपनी आय और टीडीएस का मिलान अवश्य करें, ताकि बाद में आयकर विभाग का नोटिस न आए।

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आपके लिए कौन सा ITR फॉर्म है सही?

गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न खारिज (Defective Return) हो सकता है:

  • ITR-1 (सहज): ₹50 लाख तक की कुल आय वाले उन लोगों के लिए जिनकी आय वेतन, एक मकान, पेंशन या ब्याज से है।

  • ITR-2: ₹50 लाख से अधिक आय या कैपिटल गेन्स वाले उन लोगों के लिए जिनकी बिजनेस से आय नहीं है।

  • ITR-3: बिजनेस या प्रोफेशन से आय कमाने वाले करदाताओं के लिए।

  • ITR-4 (सुगम): अनुमानित कर व्यवस्था (Presumptive Taxation) चुनने वाले छोटे कारोबारियों और पेशेवरों के लिए।

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ऑनलाइन ITR दाखिल करने का आसान तरीका

करदाता घर बैठे आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल ([https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/](https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/)) पर जाकर आसानी से ऑनलाइन रिटर्न भर सकते हैं:

  1. पैन (User ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

  2. e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return पर जाएं।

  3. असेसमेंट ईयर (Assessment Year) और दाखिल करने का माध्यम ‘Online’ चुनें।

  4. अपनी श्रेणी (Individual/HUF) और सही ITR Form का चयन करें।

  5. मांगी गई जानकारी भरें, समीक्षा करें और त्रुटि न होने पर सबमिट कर दें।

    (नोट: यदि आप प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते हैं, तो ड्राफ्ट सेव रहता है जिसे बाद में पूरा किया जा सकता है।)

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ITR भरने के बाद ‘ई-वेरिफिकेशन’ है सबसे जरूरी कदम

केवल फॉर्म सबमिट कर देने से काम खत्म नहीं होता। रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर e-Verification करना अनिवार्य है।

  • ऑनलाइन सत्यापन के माध्यम: आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), नेट बैंकिंग, ईवीसी (EVC), या डिमैट खाते से।

  • ऑफलाइन माध्यम: यदि ऑनलाइन वेरिफिकेशन संभव न हो, तो आईटीआर-वी (ITR-V) पर हस्ताक्षर करके उसे स्पीड पोस्ट द्वारा सीपीसी, आयकर विभाग, बंगलूरू – 560500 पर भेजें।

ध्यान दें: बिना सत्यापन के आपका आईटीआर अमान्य माना जाएगा।

समय पर ITR न भरने पर क्या होगा?

यदि आप 31 जुलाई की सीमा तक रिटर्न नहीं भर पाते हैं, तो आप बाद में भी बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) भर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको ₹5,000 तक का विलंब शुल्क (Late Fee) देना पड़ सकता है और बकाये टैक्स पर ब्याज भी चुकाना होगा।

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