महासमुंद (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने नशे के सौदागरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। भवानीपटना (ओड़िशा) से इंदौर (मध्य प्रदेश) तक बिछाए गए मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए पुलिस ने 62.160 किलोग्राम गांजा के साथ दो शातिर तस्करों को दबोचा है। तस्करों ने पुलिस की नज़रों से बचने के लिए कार में बेहद आधुनिक तरीके से गुप्त चैंबर (Hidden Chambers) बनाए थे, लेकिन पुलिस की सटीक मुखबिरी और त्वरित कार्रवाई ने उनके इस शातिर खेल का पर्दाफाश कर दिया।
कोमाखान थाना पुलिस और एंटी-नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सफेद स्वीफ्ट डिजायर कार (MP 13 ZW 9964) से भारी मात्रा में गांजा छत्तीसगढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश भेजा जा रहा है। पुलिस ने ग्राम गोयनाबाहरा के समीप नाकाबंदी की। जब कार को रुकवाकर तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम दंग रह गई। कार की बॉडी में विशेष रूप से दो गुप्त चैंबर बनाए गए थे, जिनमें गांजे की खेप को बेहद चालाकी से छिपाया गया था।
पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने मौके से मध्य प्रदेश के आगर जिले के रहने वाले दो तस्करों को गिरफ्तार किया है:
1. सुरेश मालवीय (30 वर्ष), निवासी देवली पीपलोन, थाना आगर।
2. एल्कार सेन (30 वर्ष), निवासी मारूबल्डिया, थाना बडोद।
आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे ओड़िशा के भवानीपटना से माल उठाकर इंदौर में इसकी सप्लाई करने जा रहे थे।
जब्ती का ब्यौरा
पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त कार और गांजे के साथ-साथ आरोपियों के मोबाइल भी जब्त किए हैं।
अवैध गांजा: 62.160 किलोग्राम, कीमत 31,08,000 रुपये।
स्वीफ्ट डिजायर कार: 01 नग, कीमत 5,00,000 रुपये।
मोबाइल फोन: 01 नग, कीमत 5,000 रुपये।
कुल संपत्ति: 36,13,000 रुपये।
एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
थाना कोमाखान में आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(c) और 29 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस अब इस मामले के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ओड़िशा में गांजे का मुख्य सप्लायर कौन है और इंदौर में इसे कहाँ पहुँचाया जाना था।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जिले के सीमावर्ती चेक-पोस्ट पर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। एंड-टू-एंड और फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के जरिए नशा तस्करों के नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

