उम्मीदों का छत्तीसगढ़ नई राह नया विश्वास नक्सलवाद से मुक्ति के साथ विकास की मजबूत शुरुआत कृषि उद्योग शिक्षा और स्वास्थ्य में निरंतर प्रगति शांति समरसता और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर राज्य…… फैज़ान अशरफ

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में “PUCC नहीं तो पेट्रोल नहीं” नियम को लागू करने की समय-सीमा को बढ़ा दिया गया है। अब यह नियम 1 अप्रैल 2026 से सख्ती के साथ लागू होगा। इससे पहले सरकार ने वाहन मालिकों को 31 मार्च तक का समय दिया है, ताकि वे अपना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) बनवा सकें।

परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना ने बताया कि यह फैसला आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार नहीं चाहती कि किसी को अचानक परेशानी हो या बिना तैयारी के नियमों का सामना करना पड़े। इसी वजह से पहले जनवरी, फिर फरवरी और अब अप्रैल तक इसकी समय-सीमा बढ़ाई गई है।

दरअसल, यह अभियान पहले 1 जनवरी से लागू होना था, लेकिन लोगों की दिक्कतों को देखते हुए पहले इसे 1 फरवरी तक टाल दिया गया। अब दूसरी बार इसे आगे बढ़ाते हुए 1 अप्रैल से सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस दौरान सभी वाहन मालिक अपने दस्तावेज पूरे कर लें, ताकि बाद में किसी तरह की असुविधा न हो।

इस बीच परिवहन विभाग पेट्रोल पंपों पर नियमों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार कर रहा है। योजना के तहत जिन वाहनों के पास वैध PUCC होगा, उन पर हरा स्टिकर लगाया जाएगा। यह स्टिकर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के माध्यम से जारी किया जाएगा, जिससे पेट्रोल पंप कर्मचारियों को वाहन पहचानने में आसानी हो सके।

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हालांकि, पेट्रोल पंप संचालकों ने इस नियम को लेकर अपनी कुछ व्यावहारिक चिंताएं भी जाहिर की हैं। उनका कहना है कि हर वाहन का PUCC जांचना आसान नहीं होगा। इससे पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ सकती है और विवाद की स्थिति भी बन सकती है। साथ ही, प्रमाणपत्र की असलियत जांचने के लिए कोई ठोस तंत्र न होने से अव्यवस्था फैलने का खतरा भी है।

सरकार की घोषणा के बाद से ही राज्य भर के PUCC केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 20 दिसंबर के बाद कई जगहों पर लंबी कतारें लग गईं, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने नए उत्सर्जन जांच केंद्रों को तेजी से लाइसेंस देने का भरोसा दिया है। परिवहन मंत्री के मुताबिक अब तक 42 फर्जी PUCC केंद्रों को बंद किया जा चुका है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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कानूनी प्रावधानों की बात करें तो मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 190(2) के तहत हर वाहन के लिए तय उत्सर्जन मानकों का पालन अनिवार्य है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए हर साल PUCC जरूरी होता है, जबकि पुराने वाहनों के लिए यह और भी अहम है। नियम तोड़ने पर पहली बार 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना, तीन महीने की जेल और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन का प्रावधान भी है।

सरकार का साफ कहना है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल के बाद किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य साफ है—स्वच्छ हवा, सुरक्षित पर्यावरण और नियमों का पालन करने वाली व्यवस्था।
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