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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। संघ के भीतर इस समय संरचना में सुधार को लेकर मंथन चल रहा है और इस पर अंतिम फैसला मार्च 2026 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लिया जाएगा। यह महत्वपूर्ण बैठक हरियाणा के समालखा में आयोजित होगी।
सूत्रों के मुताबिक संघ अपने संगठनात्मक ढांचे को समय के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में ढांचे में तीन बड़े बदलावों का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिन पर प्रतिनिधि सभा में विस्तार से चर्चा होगी।
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**11 क्षेत्रों की जगह 9 क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव**
वर्तमान में संघ ने पूरे देश को कार्य संचालन के लिए 11 क्षेत्रों में बांट रखा है, लेकिन अब इसे घटाकर 9 क्षेत्र करने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि संगठन के कामकाज को ज्यादा सुव्यवस्थित और संतुलित बनाने के लिए यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है।
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**प्रांत प्रचारकों की जगह होंगे राज्य प्रचारक**
दूसरा बड़ा बदलाव प्रांत प्रचारकों को लेकर है। अभी संघ के प्रांत सरकारी सीमाओं के अनुसार तय नहीं होते, बल्कि संगठन की सुविधा के हिसाब से बनाए जाते हैं। यही वजह है कि कई बड़े राज्यों में एक से ज्यादा प्रांत प्रचारक हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में छह और राजस्थान में तीन प्रांत प्रचारक कार्यरत हैं।
अब प्रस्ताव है कि प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाए जाएं, जो सीधे राज्य की प्रशासनिक सीमा के अनुसार काम करेंगे। यानी भविष्य में पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक ही राज्य प्रचारक होगा। इससे संगठन की संरचना ज्यादा स्पष्ट और प्रशासनिक ढांचे से मेल खाती हुई नजर आएगी।
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**संभाग प्रचारक का नया पद भी बनेगा**
नए ढांचे के तहत राज्य प्रचारक के नीचे ‘संभाग प्रचारक’ का पद भी बनाया जाएगा। यह पद संभाग यानी कमिश्नरी स्तर पर होगा। यह व्यवस्था विभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक के बीच की कड़ी के रूप में काम करेगी, जिससे कार्यों का बेहतर समन्वय हो सके।
**संघ के बढ़ते कामकाज को देखते हुए बदलाव**
संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संगठन का कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। समाज जागरण, पंच परिवर्तन और सामाजिक समरसता जैसे अभियानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जरूरी हो गया है। इससे कार्यों का विकेंद्रीकरण होगा और जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी।
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**2027 से लागू हो सकता है नया ढांचा**
सूत्रों के अनुसार, अगर मार्च 2026 की प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भी इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। संघ का शताब्दी वर्ष 2026 में पूरा होगा और उससे जुड़े कई कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक चलेंगे। ऐसे में नए ढांचे को 2027 से लागू किए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, संघ अपने 100 वर्षों की यात्रा के बाद संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है, ताकि बदलते सामाजिक और संगठनात्मक जरूरतों के अनुरूप कार्यों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।
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