त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में अचानक आसमान छूने वाले हवाई किराए से परेशान आम आदमियों को जल्द राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट में एयरलाइंस द्वारा वसूले जा रहे मनमाने और महंगे किराए के खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी है कि ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024) के तहत नियम पूरी तरह से तैयार और फाइनल कर लिए गए हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस अपारेश सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को इन फाइनल नियमों को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी, जिस पर देश भर के यात्रियों की नजरें टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट का रुख?
यह पूरा मामला सोशल एक्टिविस्ट एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। इस याचिका में मांग की गई थी कि प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा किराए में होने वाले बेकाबू उतार-चढ़ाव और अतिरिक्त शुल्कों पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, साथ ही सिविल एविएशन सेक्टर में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर का गठन किया जाए।
फरवरी 2026 में सुनवाई के दौरान बेंच ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर माना था और कहा था कि छुट्टियों व त्योहारों के समय किराए में अचानक भारी बढ़ोतरी होना चिंता का विषय है, जिसके बाद कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करना आवश्यक समझा।
किराए क्यों बढ़ रहे हैं और सरकार का क्या पक्ष है?
हवाई यात्राओं के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ा कारण विमान ईंधन (ATF – Aviation Turbine Fuel) के दामों में होने वाला उतार-चढ़ाव है। इस संबंध में सिविल एविएशन मिनिस्टर किंजरापू राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि सरकार चाहती है कि आम लोगों के लिए हवाई सफर हमेशा किफायती बना रहे। हालांकि, फ्यूल के दामों में तेजी से होने वाले बदलावों के कारण किराए को कंट्रोल में रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और एयरलाइंस के साथ लगातार बातचीत कर रही है। सरकार का मानना है कि फ्यूल सप्लायर्स को एविएशन सेक्टर का साथ देना चाहिए और एयरलाइंस को भी इस चुनौती से निपटने के लिए एक ठोस योजना तैयार करनी चाहिए। दुनिया भर में बढ़ती फ्यूल लागत के दबाव के चलते एयरलाइंस को अक्सर किराए बढ़ाने और खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही केंद्र सरकार को नए नियमों को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था। अब चूंकि नियम पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, इसलिए 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि सरकार इन नए नियमों के जरिए यात्रियों को महंगे हवाई किराए से राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाने जा रही है।


