छत्तीसगढ़ विधानसभा: तीजन बाई को दी जाएगी श्रद्धांजलि, कई महत्वपूर्ण प्रतिवेदन रखे जाएंगे पटल पर, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जरिए पुरातात्विक लापरवाही और जांजगीर अस्पताल का मुद्दा गूंजेगा

रायपुर:

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में बिजली बिलों में हो रही बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं को मिल रही छूट का मामला गूंजा। विधायक श्री अटल श्रीवास्तव द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न (क्र. 51) के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय (ऊर्जा विभाग) ने बिजली दरों में वृद्धि के कारणों और उपभोक्ताओं को दी जा रही राहत को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की।

विधायक ने पूछा- कब-कब और क्यों बढ़ीं कीमतें?

विधायक अटल श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री से पूछा था कि वर्ष 2024 से लेकर 17 जून 2026 तक घरेलू, कृषि एवं व्यावसायिक बिजली दरों में कब-कब और कितनी वृद्धि की गई है? इसके साथ ही उन्होंने बिजली दरों में बढ़ोतरी के मुख्य कारणों और वर्तमान में उपभोक्ताओं को बिजली दरों में दी जा रही छूट की विस्तृत जानकारी मांगी थी।

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मुख्यमंत्री ने बताए बिजली महंगी होने के 4 मुख्य कारण

बिजली दरों में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सदन में लिखित जवाब देते हुए बताया कि विद्युत दरों में वृद्धि मुख्य रूप से इन चार कारकों पर निर्भर करती है:

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सदन में लिखित जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में विद्युत दरों में होने वाली वृद्धि मुख्य रूप से चार बड़े कारकों पर निर्भर करती है. इसमें सबसे प्रमुख कारण बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से होने वाली विद्युत क्रय की दरें हैं, क्योंकि खरीदी महंगी होने पर उपभोक्ताओं के लिए भी दरें बढ़ जाती हैं. इसके साथ ही विभाग की नियामक परिसंपत्तियों (Regulatory Assets) का समाधान करने और बाजार में लगातार बढ़ रही महंगाई दरों के कारण भी बिजली की लागत में इजाफा होता है.

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इसके अतिरिक्त बिजली की सुचारू सप्लाई और ग्रिड व्यवस्था को बनाए रखने के लिए होने वाले संचालन एवं संधारण (रखरखाव) व्यय का भार भी दरों पर पड़ता है. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इन सभी व्यवहारिक और तकनीकी खर्चों का पूरा आकलन करने के बाद ही माननीय छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूरी तरह स्वतंत्र रूप से बिजली की दरें निर्धारित की जाती हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सभी कारकों का आकलन करने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूरी तरह स्वतंत्र रूप से बिजली की दरें निर्धारित की जाती हैं।

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उपभोक्ताओं को मिल रही छूट पर सरकार का जवाब

वर्तमान में घरेलू, कृषि और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में मिल रही राहत को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि शासन द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के अनुसार उपभोक्ताओं को छूट प्रदान की जा रही है।

दरों में हुई वृद्धि और दी जा रही छूट का पूरा आंकड़ा और विवरण सरकार ने संलग्न प्रपत्र ‘अ’ और ‘ब’ के माध्यम से विधानसभा के पटल पर रख दिया है। इस जवाब के बाद प्रदेश में बिजली की कीमतों और नियामक आयोग की भूमिका को लेकर सदन में चर्चा की संभावना बनी हुई है।

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