नई दिल्ली। आज, 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को देशभर में सावन शिवरात्रि का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आयोजित होने वाले इस पर्व पर शिवभक्त उपवास रखकर भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कांवड़ यात्रियों के लिए भी आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो अपनी यात्रा पूरी कर पवित्र गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
इस वर्ष सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने के कारण जलाभिषेक के समय को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता बनी हुई है। पंचांग के अनुसार, भद्रा काल दोपहर तक रहेगा, जिसके समाप्त होने के बाद ही जलाभिषेक और मांगलिक कार्य करना उत्तम माना गया है।
भद्रा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में मांगलिक कार्य या जलाभिषेक करना वर्जित माना जाता है। आज भद्रा दोपहर 3:25 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद ही भक्त जलाभिषेक कर सकते हैं।
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शुभ चौघड़िया: दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:25 बजे तक
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प्रदोष काल (विशेष फलदायी): शाम 6:04 बजे से रात 8:04 बजे तक
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लाभ चौघड़िया: रात 8:25 बजे से रात 9:46 बजे तक
चार प्रहर पूजा का समय
रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए समय सारणी इस प्रकार है:
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पहला प्रहर: रात 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
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दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
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तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से तड़के 3:07 बजे तक
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चौथा प्रहर: तड़के 3:07 बजे से सुबह 5:49 बजे तक
कांवड़ियों के लिए निर्देश और अन्य शुभ योग
भद्रा समाप्त होने के बाद कांवड़िए शाम के प्रदोष काल या अपनी स्थानीय मंदिर व्यवस्था के अनुसार गंगाजल अर्पित कर सकते हैं। आज शाम 6:51 बजे तक ‘सिद्धि योग’ रहेगा, जिसके बाद ‘व्यतिपात योग’ की शुरुआत होगी।
पूजा विधि और धार्मिक महत्व
सावन शिवरात्रि पर प्रातः स्नान के बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र, फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।)

