नई दिल्ली:
दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नए और कड़े नियम जारी कर दिए हैं। अब देश की सभी दूरसंचार कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं के लिए दिन-रात यानी 24 घंटे शिकायत निवारण व्यवस्था चालू रखनी होगी। नए नियमों के अनुसार, कॉल सेंटर और सपोर्ट सिस्टम पर कम से कम 16 घंटे सीधे मानव प्रतिनिधि (कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव) की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। बाकी समय कंपनियां एआई एजेंट्स और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए सेवाएं दे सकेंगी, हालांकि किसी भी तकनीक आधारित प्रणाली पर इंसानी निगरानी का होना अनिवार्य रहेगा। ट्राई का उद्देश्य कंपनियों की मनमानी रोकना और शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सुलभ व जवाबदेह बनाना है।
ग्राहकों की सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए अब कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज करने, सेवा अनुरोध भेजने और अपीलीय प्रक्रिया पूरी करने की छूट दी गई है। वेबसाइट, वेब पोर्टल, ईमेल और डाक से शिकायत व अपील की पुरानी व्यवस्था भी पहले की तरह जारी रहेगी। इसके साथ ही मामलों के त्वरित निपटारे के लिए समयसीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। अब पहली शिकायत के समाधान से असंतुष्ट होने पर ग्राहक 30 दिन के बजाय 15 दिन के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेंगे, और अपीलीय प्राधिकरण को भी अपील मिलने के ठीक 15 दिनों के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा। दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए अलग से विशेष हेल्पलाइन, समर्पित हेल्पडेस्क और सुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यवस्था करना कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
नियामक ने लापरवाह कंपनियों पर लगाम कसने के लिए कड़े वित्तीय दंड का प्रावधान भी तय किया है। यदि कोई टेलीकॉम कंपनी किसी उपभोक्ता की शिकायत को बिना ठोस कारण या गलत तरीके से खारिज करती है, तो उस पर प्रति मामला 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं गलत तरीके से अपील खारिज करने पर यह जुर्माना 5,000 रुपये प्रति मामला होगा, जो प्रति सेवा क्षेत्र प्रति तिमाही अधिकतम 20 लाख रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा, शिकायतों और अपीलों के निपटारे के बाद ग्राहकों से 5 अंकों के पैमाने पर रेटिंग (फीडबैक) ली जाएगी, जिसे हर तिमाही कंपनी की वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। कंपनियों को एक विशेष ‘उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति’ का गठन करना होगा और पूरी रिपोर्ट सीधे सीईओ व बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के समक्ष पेश करनी होगी। यदि कंपनियां तिमाही रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करती हैं, तो शुरुआती 15 दिनों तक प्रतिदिन 5,000 रुपये और उसके बाद 20,000 रुपये प्रतिदिन का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
दूरसंचार क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते चलन को देखते हुए ट्राई ने जिम्मेदार एआई उपयोग पर दिशा-निर्देशों का मसौदा भी जारी किया है, जिस पर 27 नवंबर तक सभी पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। केंद्र सरकार की ‘इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस’ के अनुरूप तैयार इस मसौदे का मुख्य मकसद टेलीकॉम नेटवर्क और ग्राहक सेवाओं में एआई के सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है, ताकि तकनीक के नाम पर ग्राहकों के अधिकारों का हनन न हो।


