रायपुर। राज्य के लाखों शिक्षकों के भविष्य, आर्थिक सुरक्षा और सेवा अधिकारों को लेकर शिक्षक संगठनों ने एक बड़े आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। वेतन विसंगति के समाधान, TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) मुद्दे पर सेवा सुरक्षा तथा पूर्व सेवा की गणना कर सभी वैधानिक लाभ देने की मांगों को लेकर शिक्षक नेताओं ने समस्त शिक्षक संवर्ग से एक मंच पर आने की अपील की है।

प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, प्रदीप पाण्डेय एवं विकास सिंह राजपूत ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्राथमिक, माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के सभी शिक्षकों को अब संगठनात्मक सीमाओं और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग मंचों से मांग उठाने के कारण शिक्षकों की आवाज को वह मजबूती नहीं मिल पा रही है, जिसकी आज जरूरत है।
तीन प्रमुख मांगों में छिपा है समाधान शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्रदेश के शिक्षकों की अधिकांश समस्याओं का हल इन्हीं तीन मुख्य मुद्दों में समाहित है:
- वेतन विसंगति: इसका न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान।
- TET मुद्दा: इस विषय से प्रभावित शिक्षकों को संपूर्ण सेवा सुरक्षा।
- पूर्व सेवा गणना: पुरानी सेवा अवधि की गणना करते हुए समस्त वैधानिक सेवा लाभों की प्राप्ति।
इन मांगों के पूरे होने से न केवल लाखों शिक्षकों के भविष्य की अनिश्चितता खत्म होगी, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में भी स्थायित्व आएगा।
प्रतिस्पर्धा छोड़, एक-दूसरे का हाथ थामने का समय नेताओं ने बल देकर कहा कि यह लड़ाई किसी एक संगठन, पद या संवर्ग की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज के स्वाभिमान की है। आज आवश्यकता किसी संगठन को छोटा या बड़ा साबित करने की नहीं, बल्कि शिक्षक शक्ति को संगठित कर सरकार के समक्ष अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की है।

