नई दिल्ली अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर आज, 13 अप्रैल को देशभर के शिक्षक टीईटी (TET) की अनिवार्यता के विरोध में सड़क पर उतरेंगे। महासंघ ने सभी जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया है। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों को टीईटी की शर्तों से मुक्त रखा जाए।
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“पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अन्याय”
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पाण्डेय और राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने स्पष्ट किया कि जो शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी नियुक्ति आरटीई एक्ट से पहले हुई है, उन पर अब नई योग्यता शर्तें थोपना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए।
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न्यायालय तक लड़ी जाएगी लड़ाई
मुख्य विधिक प्रभारी ने कहा कि यह संघर्ष केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “हम मशाल से लेकर न्यायालय तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। कल का दिन हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है और हम मशाल जलाकर सरकार का ध्यान इस गंभीर विसंगति की ओर आकर्षित करेंगे।”
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शिक्षक संगठनों की एकजुटता
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कई शिक्षक संगठनों ने मिलकर महासंघ का गठन किया है। विभिन्न शिक्षक संघों ने प्रदेश और जिला स्तर पर अपील जारी कर सभी शिक्षकों से आज के मशाल जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अनुरोध किया है। शिक्षकों का मानना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना लोकतांत्रिक विरोध जारी रखेंगे।


