अब स्कूल और दफ्तरों में ‘रील्स’ बनाने वाले सरकारी कर्मचारियों की खैर नहीं , ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई
रायपुर: शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत देशभर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य किए जाने के फैसले ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। इस अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के लगभग 25 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके करोड़ों परिजनों में केंद्र सरकार के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
छत्तीसगढ़ के जागरूक शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस कानून में अविलंब संशोधन की मांग की है।
अध्यादेश लाकर कानून बदलने की मांग
छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सरकार तत्काल एक अध्यादेश (Ordinance) लाए। उनका कहना है कि शिक्षा के अधिकार कानून 2009 में आवश्यक संशोधन कर सेवारत शिक्षकों को टीईटी की इस अनिवार्य शर्त से मुक्त किया जाना चाहिए।
क्यों है शिक्षकों में आक्रोश?
शिक्षकों का तर्क है कि जो शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, उन पर अचानक पात्रता परीक्षा थोपना उनके अनुभव और सेवा काल का अपमान है। प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र साहू और प्रदेश सचिव राजेंद्र लाडेकर ने संयुक्त रूप से कहा कि इस अनिवार्यता से देश के लाखों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटक रही है, जिससे उनके परिवारों में असुरक्षा का माहौल है।
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इन दिग्गज शिक्षक नेताओं ने उठाई आवाज
इस मुहिम को छत्तीसगढ़ के विभिन्न शिक्षक प्रतिनिधियों का व्यापक समर्थन मिला है। पत्र लिखने वालों में मुख्य रूप से:भोजराम साहू, गायत्री मंडलोई, महेश्वर कोटपरिहा, हरिशंकर पटेल, कमलेश कुमार भारती। नरेंद्र तिवारी, केशव पटेल, रोहित कुमार पटेल, अमर दास बंजारे, रामसेवक पैकरा, राजेंद्र कुमार साहू, दिनेश कुमार लहरें, देवेंद्र वर्मा।
- अन्य सहयोगी: संतोष जैन, मनोज यादव, अभिषेक तिवारी, सुषमा प्रजापति, मुकेश दिवाकर, शंभूराम साहू, चंद्रशेखर सारथी, अरविंद पांडे, देवीदयाल साहू, महेश शर्मा, बिमला लकड़ा, मंजू शर्मा सहित दर्जनों शिक्षक नेता शामिल हैं।
शिक्षक संघों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर विचार नहीं किया और आरटीई एक्ट में सुधार नहीं किया, तो यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।

