जशपुरनगर:
जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खेती-किसानी का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन यह विकास अब सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया है। खेतों में जुताई के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘केज व्हील’ (लोहे के धारदार पहिये) लगे ट्रैक्टरों को खुलेआम सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है, जिससे आम राहगीरों की जान जोखिम में है।
सड़कों की बदहाली और हादसों का खतरा
बारिश के मौसम में ट्रैक्टर के पहियों को कीचड़ में धंसने से बचाने के लिए किसान केज व्हील का उपयोग करते हैं। नियमों के अनुसार, खेत से बाहर निकलते ही इन व्हील्स को हटाना अनिवार्य है, लेकिन लापरवाही के चलते इन्हें हटाए बिना ही ट्रैक्टर सड़कों पर लाए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप: लोहे के भारी केज व्हील डामर की सड़कों को खोद रहे हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ट्रैक्टरों के साथ खेतों से आने वाला कीचड़ सड़क पर फैल रहा है, जिससे दोपहिया और साइकिल चालकों के फिसलने और गंभीर दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है।
52 किलोमीटर के सफर में सात ट्रैक्टर: नियम ताक पर
हाल ही में संपन्न जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इन ट्रैक्टरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जशपुर से सन्ना तक के 52 किलोमीटर के मार्ग पर ही सात ट्रैक्टर बिना केज व्हील हटाए चलते पाए गए। चालकों का तर्क है कि बार-बार पहिये बदलने में समय लगता है, इसलिए वे जोखिम उठाकर सड़क पर ही ट्रैक्टर चला रहे हैं।
साल 2025 में 311 मौतें, फिर भी लापरवाही जारी
जिले में सड़क सुरक्षा की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सड़क हादसों में 311 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। पुलिस हेलमेट और सीट बेल्ट के लिए जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन केज व्हील वाले ट्रैक्टरों की मनमानी प्रशासन के इन तमाम प्रयासों को कमजोर साबित कर रही है।
प्रशासन का सख्त रुख
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए **अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पाटनवार** ने कहा: “केज व्हील लगाकर सड़क पर चलने वाले ट्रैक्टरों के खिलाफ नियमों का उल्लंघन हो रहा है। प्रशासन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे ट्रैक्टर मालिकों और चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

