नई दिल्ली/रायपुर:
देशभर के ड्राइवरों के हकों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर अखिल भारतीय ड्राइवर संगठन ने 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल पर जाने का एलान किया है। संगठन राष्ट्रीय स्तर पर ‘ड्राइवर आयोग’ के गठन और राज्यों में ‘ड्राइवर वेलफेयर बोर्ड’ की स्थापना की मांग कर रहा है। यदि यह आंदोलन हुआ, तो देश में परिवहन सेवाएं ठप होने और फल-सब्जी, दूध जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह चरमराने की आशंका है।
राज्यों में भेदभाव का आरोप, छत्तीसगढ़ पर नाराजगी
अखिल भारतीय ड्राइवर संगठन की कोआर्डिनेशन कमेटी के सदस्य और छत्तीसगढ़ ड्राइवर संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेन सेन ने बताया कि महाराष्ट्र समेत चार राज्यों में वेलफेयर बोर्ड गठित किए जा चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
संगठन का कहना है कि वर्ष 2025 में हुए आंदोलन के दौरान शासन ने ठोस कार्रवाई का आश्वासन देकर महज 36 घंटे में हड़ताल स्थगित करा दी थी, लेकिन आज तक उन आश्वासनों पर कोई अमल नहीं हुआ। वादों की अनदेखी से नाराज संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
5 करोड़ ड्राइवरों के जुड़ने का दावा
आंदोलन को धार देने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकें और जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। संगठन का दावा है कि इस देशव्यापी चक्का जाम में करीब 5 करोड़ छोटे-बड़े ड्राइवर शामिल हो सकते हैं। नेताओं ने साफ किया है कि इस बार पहले ही दिन से पूरी ताकत के साथ चक्का जाम किया जाएगा।
ट्रांसपोर्टर्स की चिंता: बातचीत से निकले हल
इधर, हड़ताल की घोषणा के बाद परिवहन क्षेत्र के प्रतिनिधियों और ट्रांसपोर्टरों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि बरसात के सीजन के बाद ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री पहले ही भारी आर्थिक मंदी और दबाव से गुजर रही है। ऐसे में अचानक हड़ताल होने से कारोबार, आम जनता और खुद ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर गहरा असर पड़ेगा। प्रतिनिधियों ने सरकार, ट्रक मालिकों और ड्राइवर संगठनों से अपील की है कि वे 12 नवंबर से पहले मेज पर बैठकर बातचीत करें ताकि किसी सर्वमान्य समाधान पर पहुंचा जा सके।


