अगर आप बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीद लेते हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने 12% या उससे अधिक एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली 30 ml से बड़ी पैकिंग की कफ सिरप और कुछ अन्य दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ऐसी दवाएं केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन (Prescription) पर ही मिलेंगी।
सरकार का यह फैसला दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे के लिए कफ सिरप के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
- कफ सिरप में अल्कोहल क्यों मिलाया जाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, कफ सिरप में अल्कोहल मिलाने के कई वैज्ञानिक कारण होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दवा में मौजूद अल्कोहल का उद्देश्य नशा नहीं, बल्कि दवा की गुणवत्ता बनाए रखना होता है। हालांकि, अधिक मात्रा में मौजूद अल्कोहल और बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- यह दवा में मौजूद तत्वों (Ingredients) को घोलने का काम करता है।
- दवा को लंबे समय तक खराब होने से बचाता है।
- सिरप का स्वाद और बनावट बेहतर बनाता है।
- कुछ दवाओं के शरीर में अवशोषण (Absorption) को आसान बनाता है
- कैसे पता करें कफ सिरप में कितना अल्कोहल है?
- दवा के लेबल पर “Ethyl Alcohol IP” या “Alcohol Content” जरूर देखें।
- अगर लेबल पर “Contains 12% v/v Ethyl Alcohol” या इससे अधिक लिखा है, तो ऐसी कफ सिरप अब केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलेगी।
- Schedule H1 क्या है?
- Schedule H1 में शामिल दवाएं केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही खरीदी जा सकती हैं।
- मेडिकल स्टोर को इन दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड रखना होता है और बिना पर्चे के बेचने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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बिना डॉक्टर की सलाह के लेना क्यों हो सकता है खतरनाक?
- अधिक मात्रा में सेवन से चक्कर, सुस्ती और बेहोशी हो सकती है।
- बच्चों में यह ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
- शराब या अन्य दवाओं के साथ लेने पर गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
- लंबे समय तक गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर निर्भरता (Dependence) बनने का खतरा बढ़ सकता है।
- सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
- कई राज्यों में अधिक अल्कोहल वाली कफ सिरप का नशे के लिए गलत इस्तेमाल बढ़ रहा था, जिसे रोकने के लिए यह नियम लागू किया गया है।
- इसका उद्देश्य दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना, मरीजों की सुरक्षा बढ़ाना और बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाओं की बिक्री को नियंत्रित करना है।

