त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों के लिए खाने के तेल की कीमतों को लेकर राहत की खबर सामने आई है। खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित रखने और बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने तेल उत्पादकों और रिफाइनरों से खुदरा कीमतों में कटौती करने की अपील की है।
इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती का मिलेगा फायदा
देश में खाद्य तेलों की घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता है। घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने खाद्य तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है।
IVPA का कहना है कि ड्यूटी में कमी का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। संगठन के मुताबिक, इससे आयात लागत कम होने के साथ घरेलू बाजार में आयातकों और रिफाइनरों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बेहतर हो सकती है।
(IVPA) ने कंपनियों से कीमत घटाने की अपील
IVPA के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने बताया कि एसोसिएशन ने अपने सदस्य तेल उत्पादकों और रिफाइनरों को पत्र भेजकर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने की अपील की है।
संगठन ने कंपनियों से यह भी कहा है कि वे अपनी साप्ताहिक खुदरा कीमतों की जानकारी सरकार को उपलब्ध कराएं, ताकि बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
IVPA के मुताबिक इसका उद्देश्य केवल कीमतों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि खाद्य तेल कारोबार में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और बाजार में स्थिरता बनाए रखना भी है।
त्योहारों में बढ़ेगी खाने के तेल की मांग
त्योहारी सीजन में घरों के अलावा मिठाई, नमकीन, फूड प्रोसेसिंग और होटल-रेस्तरां कारोबार में खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में तेल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
IVPA का कहना है कि वैश्विक बाजार में पिछले कुछ महीनों के दौरान खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। भू-राजनीतिक तनाव, मौसम संबंधी चुनौतियों और बायोफ्यूल उत्पादन में वनस्पति तेलों की बढ़ती मांग जैसे कारणों का भी बाजार पर असर पड़ा है।
सरसों से लेकर पाम ऑयल तक मिल सकती है राहत
यदि कंपनियां इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती का पूरा लाभ खुदरा बाजार तक पहुंचाती हैं, तो आने वाले हफ्तों में सरसों तेल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल और पाम ऑयल समेत कई खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, वास्तविक कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह वैश्विक बाजार की कीमतों, आयात लागत, रुपये की स्थिति और घरेलू मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
त्योहारी सीजन में खाद्य तेल की मांग बढ़ने के बीच इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती और कंपनियों से कीमत घटाने की अपील से ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार द्वारा कीमतों की निगरानी और कंपनियों की साप्ताहिक मूल्य रिपोर्टिंग से यह भी नजर रखी जा सकेगी कि ड्यूटी कटौती का लाभ खुदरा ग्राहकों तक पहुंच रहा है या नहीं।

