नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ गांवों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कामों का दायरा बढ़ाया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के तहत 375 तरह के कामों की सूची अधिसूचित की है।
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नई सूची में पानी, गांवों की बुनियादी सुविधाओं, ग्रामीण आजीविका और आपदा प्रबंधन से जुड़े कामों को शामिल किया गया है। पुराने ढांचे में 266 तरह के काम थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 375 हो गई है। मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के अवसर देने के साथ ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करना है, जिनका लंबे समय तक गांवों को फायदा मिल सके।
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पानी से जुड़े सबसे ज्यादा काम
नई सूची में पानी की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े 128 काम शामिल किए गए हैं। इनमें छोटे बांध बनाने, भूजल स्तर बढ़ाने वाले ढांचे तैयार करने, नदियों और नालों के सुधार तथा जलभराव वाली जमीन को उपयोगी बनाने जैसे काम शामिल हैं।
खेतों तक पानी पहुंचाने वाली नालियों की मरम्मत के साथ ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। छतों से बारिश का पानी जमा करने के अलावा बर्फ के स्तूप और आर्टिफिशियल ग्लेशियर जैसे स्थानीय जल संरक्षण उपाय भी सूची में शामिल किए गए हैं।
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गांवों में बनेंगे स्वास्थ्य केंद्र और पुस्तकालय
गांवों की बुनियादी सुविधाओं के लिए 111 तरह के काम तय किए गए हैं। इनमें सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु चिकित्सा केंद्र, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर जैसे काम शामिल हैं।
सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का निर्माण भी कराया जा सकेगा। जल जीवन मिशन के तहत बनाए गए जलापूर्ति ढांचे की मरम्मत और रखरखाव के साथ कचरे की छंटाई, रीसाइक्लिंग और इस्तेमाल किए गए पानी के उपचार से जुड़ी सुविधाएं भी बनाई जा सकेंगी।
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खेती और ग्रामीण कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए आजीविका से जुड़े 98 तरह के कामों को सूची में जगह दी गई है। इनमें कृषि उत्पादों की सफाई, छंटाई और पैकिंग के लिए इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, छोटी आटा मिलें, मंडी परिसर और डेयरी से जुड़े ढांचे शामिल हैं।
इसके अलावा मशरूम उत्पादन, रेशम उत्पादन, पॉलीहाउस और मछली पालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जा सकेगा। महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यस्थल, SHE Marts और समूहों के संघों के भवन बनाए जाने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र बनाने वाले काम भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
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बाढ़ और दूसरी आपदाओं से बचाव पर भी जोर
नई व्यवस्था में आपदा की तैयारी और उससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है। इसमें 38 तरह के काम शामिल हैं।
बाढ़ के दौरान इस्तेमाल होने वाले राहत आश्रय, मिट्टी खिसकने से रोकने वाली दीवारें, तटबंधों को मजबूत करने और बाढ़ से बचाव के काम कराए जा सकेंगे। आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक सुविधाओं की बहाली को भी इस सूची में शामिल किया गया है। जंगल की आग को फैलने से रोकने के उपाय भी किए जा सकेंगे।
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कमजोर परिवारों, महिलाओं और युवाओं पर भी फोकस
नई सूची में खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया है। कुल 375 कामों में 181 काम खेती एवं इससे जुड़े क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनमें 52 काम व्यक्तिगत लाभार्थियों से जुड़े हैं।
कमजोर और अंत्योदय परिवारों के लिए 107 काम चिह्नित किए गए हैं। इनमें आवास, शौचालय, ऊर्जा, सिंचाई और पशुओं के लिए आश्रय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं से जुड़े 36-36 काम भी चिह्नित किए गए हैं।
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ग्राम सभा तय करेगी गांव में कौन-सा काम होगा
हर गांव में स्थानीय जरूरतों के आधार पर कामों का चयन विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित कामों को ग्राम सभा की मंजूरी मिलेगी। इसके बाद डिजिटल माध्यम से इनकी निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।
इसके लिए विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर की अलग-अलग योजनाओं के संसाधनों को आपस में जोड़ना और एक ही काम पर अलग-अलग योजनाओं से होने वाले दोहराव वाले खर्च को रोकना है।
नई सूची के साथ ग्रामीण रोजगार योजना का फोकस केवल मजदूरी देने तक सीमित रखने के बजाय गांवों में पानी, खेती, आजीविका, बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन से जुड़ी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करने पर भी रखा गया है।

