केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच राज्य सरकारों के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें भी केंद्र के साथ ही वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। आम तौर पर देखा गया है कि वेतन आयोग का फायदा सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलता है, जबकि राज्य सरकारें बाद में इस पर निर्णय लेती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य सरकारों के लिए यह अनिवार्य नहीं होता कि वे केंद्र सरकार के साथ ही वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करें। नेक्सडिगम के पेरोल सर्विसेज डायरेक्टर रामचंद्रन कृष्णमूर्ति का कहना है कि राज्यों के लिए केंद्र की सिफारिशें अपनाने की कोई तय समय-सीमा नहीं होती। हर राज्य अपनी आर्थिक स्थिति और बजट के आधार पर फैसला करता है।
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वेतन संशोधन में लगने वाला समय भी राज्यों में अलग-अलग होता है। कुछ राज्य छह महीने से एक साल के भीतर केंद्र के अनुरूप वेतनमान लागू कर देते हैं, जबकि कई राज्य इसके लिए अपना अलग वेतन आयोग गठित करते हैं। इस प्रक्रिया में एक से तीन साल तक का समय लग सकता है। सातवें वेतन आयोग के दौरान भी कई राज्यों ने 2020 या उसके बाद जाकर संशोधित वेतन लागू किया था।
राज्यों पर केंद्र के वेतन आयोग को मानना बाध्यकारी नहीं है। राज्य सरकारें अपनी जरूरत और संसाधनों के अनुसार अलग वेतन आयोग बना सकती हैं। उदाहरण के तौर पर केरल में फिलहाल 11वां वेतन आयोग लागू है, कर्नाटक में सातवां और पंजाब में छठा वेतन आयोग चल रहा है। इससे साफ है कि राज्यों का वेतन ढांचा एक जैसा नहीं होता।
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हालांकि वेतन आयोग अलग होने के बावजूद केंद्र और राज्यों के वेतन ढांचे में काफी समानता देखने को मिलती है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के मनजीत सिंह पटेल के अनुसार फिटमेंट फैक्टर में भी बड़ा अंतर नहीं होता। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जबकि पंजाब में यह 2.59 और उत्तर प्रदेश में 2.57 रहा। राज्य सरकारें अपनी स्थिति के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव कर सकती हैं।
जहां तक एरियर का सवाल है, आदर्श स्थिति में पिछला वेतन आयोग समाप्त होने के अगले दिन से एरियर देय माना जाता है। लेकिन वास्तविकता में एरियर की तारीख राज्य सरकार की अधिसूचना पर निर्भर करती है। जब तक नया वेतन आयोग लागू करने की तिथि घोषित नहीं होती, तब तक एरियर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती।
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कुल मिलाकर, राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी वेतन संशोधन का लाभ जरूर मिलता है, लेकिन यह प्रक्रिया केंद्र की तुलना में थोड़ी धीमी होती है। राज्य सरकारें समिति गठित कर रिपोर्ट का अध्ययन करती हैं और वित्तीय प्रभाव को देखते हुए अंतिम फैसला लेती हैं।
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