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नई दिल्ली: भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास सेंटीमीटर स्तर तक की सटीकता वाला रीयल-टाइम लोकेशन सिस्टम है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी दी कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने देश भर में 1,145 सतत परिचालन संदर्भ स्टेशनों (CORS) का एक शक्तिशाली नेटवर्क स्थापित किया है। यह तकनीक न केवल मैपिंग को बदलेगी, बल्कि ड्रोन संचालन, निर्माण और सटीक कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
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प्रशासनिक और तकनीकी मजबूती
सरकार ने डेटा के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एकल आधिकारिक प्रशासनिक सीमा डेटाबेस (ABDB) विकसित किया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय के सहयोग से तैयार यह डेटाबेस सीमाओं से जुड़े विवादों को खत्म करने और सरकारी योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन में मील का पत्थर साबित होगा। इसके अतिरिक्त, देश के 10 राज्यों के लिए उच्च सटीकता वाला ‘जियोइड मॉडल’ भी विकसित किया जा चुका है, जो भौगोलिक ऊंचाई और बनावट की सटीक जानकारी देगा।
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वैश्विक मानकों पर खरा भारत
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत में डेटा अधिग्रहण (Acquisition) और प्रसंस्करण (Processing) की पूरी अवसंरचना BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) और ISO (अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन) जैसे वैश्विक निकायों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है। यह सुनिश्चित करता है कि भारत का भू-स्थानिक डेटा न केवल सुरक्षित है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्य है।
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बजट 2025-26: राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, सरकार ने केंद्रीय बजट (2025-26) में ‘राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन’ की घोषणा की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के मूलभूत भू-स्थानिक ढांचे को और अधिक आधुनिक बनाना और डेटासेट्स को विकसित करना है। यह मिशन उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे 5G, ऑटोनॉमस वाहनों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को आधार प्रदान करेगा।
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