भोपाल: मध्य प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने की तैयारी के बीच विवाद गहरा गया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) को परीक्षा एजेंसी नियुक्त करने और परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों के पदनाम संबंधी आदेश जारी किए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों उपेंद्र कौशल और राजेश मिश्रा ने पूर्व में नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी थोपे जाने को लेकर विभाग से आठ प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
वरिष्ठता, वेतन और सेवा निरंतरता पर गहराया संशय
शिक्षक नेताओं का कहना है कि वे परीक्षा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन नियमों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि विभाग लिखित रूप से यह स्पष्ट करे कि वर्ष 2018 से पहले नियुक्त शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति और सेवा निरंतरता पर इस परीक्षा का क्या असर होगा।
शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि टीईटी में बैठने या उत्तीर्ण होने के बाद कहीं उनकी मूल नियुक्ति तिथि में बदलाव तो नहीं कर दिया जाएगा। शिक्षक संगठनों ने स्पष्टीकरण मांगा है कि टीईटी से शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतनमान, पेंशन और अन्य सेवाकालीन लाभ प्रभावित होंगे या नहीं। इसके अलावा एजुकेशन पोर्टल और IFMIS पोर्टल में दर्ज मूल नियुक्ति तिथि के साथ कोई छेड़छाड़ न करने की गारंटी की मांग की गई है।
शिक्षक संगठनों ने विभाग से पूछे ये 8 प्रमुख सवाल
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किन शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया है और किन्हें इससे छूट मिलेगी?
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पूर्व में नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर सेवा शर्तों का कौन-सा नियम लागू होगा?
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वर्ष 2018 से पहले नियुक्त शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति और सेवा निरंतरता का क्या भविष्य होगा?
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क्या टीईटी में शामिल होने या उत्तीर्ण करने से वरिष्ठता और पहली नियुक्ति तिथि प्रभावित होगी?
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परीक्षा पास करने के बाद शिक्षकों के सेवा अभिलेखों (सर्विस रिकॉर्ड) में कोई बदलाव किया जाएगा?
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IFMIS और एजुकेशन पोर्टल में दर्ज प्रथम नियुक्ति तिथि किस आधार पर सुरक्षित रहेगी?
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पहले से नियमित सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए परीक्षा में बैठने की बाध्यता का वैधानिक आधार क्या है?
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अलग-अलग वर्षों में नियुक्त और विभिन्न संवर्गों के शिक्षकों के लिए विभाग की अंतिम कार्ययोजना क्या है?
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर कानूनी लड़ाई भी तेज हो चुकी है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में ‘राजेश मिश्रा विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य’ याचिका दायर की गई है, जिसमें सेवारत शिक्षकों पर टीईटी लागू करने के कानूनी औचित्य को चुनौती दी गई है। शिक्षक नेताओं ने दो टूक कहा है कि जब तक विभाग संवर्गवार और नियुक्ति वर्ष के अनुसार लिखित दिशा-निर्देश जारी नहीं करता, तब तक परीक्षा की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।























