संयुक्त जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होने के बाद 8 अधिकारी-कर्मचारियों पर एफआईआर, कार्रवाई में देरी से किसानों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी
*संवाददाता उमेश कुमार प्रजापति* अंबिकापुर सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड अंतर्गत केरजू प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में 127 किसानों के नाम पर लगभग 1 करोड़ 93 लाख रुपये के कथित फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
किसानों की शिकायत पर गठित संयुक्त जांच दल द्वारा अनियमितताओं की पुष्टि किए जाने तथा सरगुजा कलेक्टर के निर्देश पर 8 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान विक्रय के बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए सहकारी बैंक का रुख किया।
इस दौरान उन्हें पता चला कि उनके खातों में पहले से ही केसीसी ऋण दर्ज है और धान बिक्री की राशि उसी ऋण में समायोजित कर ली गई है। कई किसानों का आरोप है कि उन्होंने कभी कोई ऋण लिया ही नहीं था, जबकि कुछ किसानों ने केवल 30 से 60 हजार रुपये तक का ऋण लिया था। इसके विपरीत बैंक के अभिलेखों में उनके नाम पर 3 से 5 लाख रुपये तक का ऋण दर्ज पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए किसानों की शिकायत पर संयुक्त जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर कर किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत करने और राशि आहरित किए जाने सहित विभिन्न अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद सरगुजा कलेक्टर ने सहकारी बैंक एवं समिति से जुड़े 8 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। हालांकि अपराध दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से प्रभावित किसानों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वहीं, तत्कालीन समिति प्रबंधक स्वर्गीय दिनेश गुप्ता की आत्महत्या के मामले के बाद अब उच्च अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है।
भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष अनिल निराला ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई तथा प्रभावित किसानों को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है।
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उनका कहना है कि जब संयुक्त जांच में अनियमितताएं प्रमाणित हो चुकी हैं और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, तब आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी कई सवाल खड़े करती है।
गौरतलब है कि इस कथित घोटाले को लेकर पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने भी गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की।
अब क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और अपराध दर्ज हो चुका है, तब आरोपियों की गिरफ्तारी में आखिर देरी क्यों हो रही है। किसानों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि
यदि शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो सहकारी संस्थाओं के प्रति किसानों का विश्वास कमजोर होगा।
प्रभावित किसानों और सामाजिक संगठनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, पूरे प्रकरण में उच्च अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन किसानों के साथ कथित धोखाधड़ी हुई है उन्हें शीघ्र न्याय और आर्थिक राहत प्रदान की जाए।

