रायपुर:
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले की व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए आवेदन से लेकर दाखिले तक की पूरी प्रक्रिया करीब छह महीने पहले ही पूरी कर ली जाएगी। नए शेड्यूल के अनुसार ऑनलाइन आवेदन दिसंबर 2026 में लिए जाएंगे और 10 फरवरी 2027 तक प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी।
यह फैसला सत्र 2026-27 में तीन चरणों की लॉटरी के बावजूद प्रदेशभर में RTE की 6,562 सीटें खाली रह जाने और अगस्त तक प्रक्रिया खिंचने के चलते लिया गया है।
नए सत्र 2027-28 का प्रस्तावित टाइम-टेबल
अगले सत्र से बार-बार लॉटरी निकालने के बजाय केवल एक ही चरण में दाखिला देने की तैयारी है, ताकि नया सत्र शुरू होते ही बच्चे अन्य सामान्य छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू कर सकें:
| चरण | निर्धारित समय-सीमा |
| ऑनलाइन आवेदन | 1 से 31 दिसंबर 2026 |
| कंप्यूटर लॉटरी | 11 से 12 जनवरी 2027 |
| दाखिला पूर्ण करने की अंतिम तिथि | 10 फरवरी 2027 |
क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? 41 हजार आवेदनों के बाद भी 6,562 सीटें खाली
सत्र 2026-27 के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त तक प्रक्रिया चलने के बाद भी कुल 23,097 सीटों में से सिर्फ 16,535 पर ही दाखिला हो सका। विडंबना यह रही कि 6,851 स्कूलों के लिए कुल 41,813 आवेदन आए थे, फिर भी 11,754 आवेदकों को सीट नहीं मिल सकी और हजारों सीटें खाली रह गईं।
शहरों में रायपुर तो बस्तर संभाग में दंतेवाड़ा सबसे आगे
प्रदेश में सबसे ज्यादा 570 सीटें राजधानी रायपुर में खाली रह गईं। यहां 3,201 सीटों पर 7,742 आवेदन आए थे, लेकिन दाखिला केवल 2,631 बच्चों का हुआ।बिलासपुर में 511 और दुर्ग में 414 सीटें खाली पड़ी हैं। सुदूर अंचलों में स्थिति और भी खराब रही। दंतेवाड़ा की 411 सीटों में से केवल 36 बच्चों का दाखिला हुआ और 375 सीटें खाली रह गईं। बीजापुर में 320 में से 297 और सुकमा में 312 में से 291 सीटें खाली रह गईं। इसके अलावा सरगुजा में 299 सीटें नहीं भर सकीं।
विभाग का मानना है कि समय से छह महीने पहले दिसंबर में आवेदन लेने और फरवरी तक एडमिशन फाइनल करने से न तो सीटें खाली रहेंगी और न ही गरीब बच्चों की पढ़ाई में देरी होगी।























