विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ताज़ा UDISE+ रिपोर्ट से स्कूली शिक्षा को लेकर एक और बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक (सेकेंडरी) स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की दर यानी ड्रॉपआउट रेट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही इस स्तर पर छात्रों के नामांकन और स्कूल में टिके रहने की दर (रिटेंशन रेट) में भी शानदार बढ़ोतरी हुई है, जो देश के शैक्षिक ढांचे की मजबूती को दर्शाती है।
ड्रॉपआउट रेट घटकर हुआ 7 प्रतिशत
लंबे समय से माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर बच्चों का स्कूल छोड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इस मोर्चे पर बड़ी कामयाबी मिलती दिख रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सेकेंडरी स्तर पर छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर पिछले वर्ष के 8.2 प्रतिशत से घटकर अब केवल 7 प्रतिशत रह गई है।
ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) और रिटेंशन रेट में भारी उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर न केवल बच्चे स्कूल में रुक रहे हैं, बल्कि नए दाखिलों (एडमिशन) में भी तेजी आई है:
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ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER): सेकेंडरी स्तर पर जीईआर पिछले वर्ष के 68.5 प्रतिशत से बढ़कर अब 71.7 प्रतिशत हो गया है।
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रिटेंशन रेट (स्कूल में टिके रहने की दर): इस स्तर पर छात्रों का रिटेंशन रेट भी 47.2 प्रतिशत से एक लंबी छलांग लगाकर 51.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आधे से अधिक बच्चे अपनी माध्यमिक शिक्षा को बीच में छोड़े बिना पूरा कर रहे हैं।
क्यों आया यह सकारात्मक बदलाव?
शिक्षा मंत्रालय ने इस बेहतरीन सुधार का सबसे प्रमुख कारण देश भर में माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या में हुई वृद्धि और उनकी आसान उपलब्धता को बताया है। अब बच्चों, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके लिए पढ़ाई जारी रखना पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गया है।

