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रायपुर, 25 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक प्रहार किया है। विभाग ने प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो शिक्षक अपने मूल अध्यापन कार्य को त्यागकर अन्य सरकारी कार्यालयों या संस्थानों में गैर-शिक्षकीय कार्यों (बाबूगीरी या अन्य अटैचमेंट) में संलग्न हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए।
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प्रशासन का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर उन स्कूलों की गिरती शिक्षा व्यवस्था को बचाने की कोशिश है, जहाँ शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। डीपीआई द्वारा जारी इस आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि शिक्षा विभाग के कई शिक्षक और कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना वाली जगहों को छोड़कर रसूख या सुविधा के चलते दूसरे विभागों में जमे हुए हैं, जिससे शैक्षणिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि ऐसे सभी कर्मचारियों को उनकी मूल संस्थाओं में उपस्थिति देने के लिए निर्देशित करें और की गई कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट संचालनालय को सौंपें।
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गौरतलब है कि संलग्नीकरण (अटैचमेंट) के इस खेल को खत्म करने के लिए वर्ष 2024 में भी इसी तरह की सख्ती दिखाई गई थी। उस दौरान भी गैर-शिक्षकीय कार्यों में लगे शिक्षकों को सात दिनों के भीतर अपनी मूल शालाओं में जॉइनिंग देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई और रसूख के चलते यह खेल बदस्तूर जारी रहा। अब रायपुर से जारी इस नए और कड़े आदेश ने उन शिक्षकों और अधिकारियों की नींद उड़ा दी है जो सालों से शिक्षण कार्य से बचकर मलाईदार दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि रायपुर सहित पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों को उनके हक के शिक्षक वापस मिलेंगे।
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