रायपुर, 21 अक्टूबर 2026।
छत्तीसगढ़ के सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के मुद्दे पर बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। शिक्षक साझा मंच द्वारा लंबे समय से किए जा रहे संघर्ष, लगातार ज्ञापन, अधिकारियों से चर्चा और मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के समक्ष मांग उठाने के प्रयासों के बीच छत्तीसगढ़ शासन ने सेवारत गैर-टीईटी शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित कराने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की है। शासन के 21 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, इस परीक्षा का आयोजन वर्ष में न्यूनतम दो बार निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में कराने की बात कही गई है।

शिक्षक साझा मंच के संचालक रविन्द्र राठौर, विकास राजपूत, प्रदीप पांडे, जाकेश साहू, लैलून भारद्वाज, चेतन बघेल इसे अपने निरंतर संघर्ष की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, हालांकि, अब शिक्षकों की निगाहें परीक्षा आयोजन के विस्तृत कार्यक्रम और संबंधित विभाग द्वारा जारी होने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों पर टिकी हैं।
मुख्यमंत्री के समन्वय में प्रस्ताव को मिली सहमति
स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के उप सचिव द्वारा हस्ताक्षरित पत्र क्रमांक ESTB-1/4033/2026/20-3, दिनांक 21 अक्टूबर 2026 में लोक शिक्षण संचालनालय के 24 सितंबर 2026 के प्रस्ताव पर शासन की सहमति का उल्लेख किया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सेवारत गैर-टीईटी शासकीय शिक्षकों के लिए निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से CBT परीक्षा आयोजित की जाए और यह परीक्षा वर्ष में न्यूनतम दो बार कराना सुनिश्चित किया जाए। पत्र में इस संबंध में मुख्यमंत्री जी के समन्वय में अनुमोदन का भी उल्लेख है।
यह निर्णय उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से सेवा में रहते हुए टीईटी की अनिवार्यता और उससे जुड़ी सेवा संबंधी चिंताओं को लेकर समाधान की मांग कर रहे हैं।
शिक्षक साझा मंच के संघर्ष को मिली बड़ी मजबूती
सेवारत शिक्षकों के टीईटी मुद्दे को लेकर शिक्षक साझा मंच लगातार सक्रिय रहा है। मंच ने शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, विभागीय टीईटी के आयोजन और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान की मांग को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से संवाद, विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा, ज्ञापन और आंदोलन की चेतावनी के माध्यम से मंच ने इस मुद्दे को शासन के समक्ष लगातार रखा।
शिक्षक साझा मंच की प्रमुख मांग रही है कि सेवारत शिक्षकों को विभागीय स्तर पर टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर मिले, ताकि वे अपनी सेवा जारी रखने और भविष्य से जुड़ी चिंताओं के बीच एक व्यावहारिक रास्ता प्राप्त कर सकें। शासन के ताजा पत्र में वर्ष में कम से कम दो बार परीक्षा कराने पर सहमति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एक से अधिक पालियों में परीक्षा, प्रश्नपत्र का स्तर समान
शासन के पत्र में परीक्षा की व्यवस्था को लेकर यह भी उल्लेख है कि परीक्षा एक से अधिक पालियों में आयोजित की जा सकेगी, लेकिन सभी पालियों के लिए तैयार प्रश्नपत्रों का स्तर एक समान रखा जाएगा। इससे परीक्षा के आयोजन में व्यापक भागीदारी की व्यवस्था बनाने का रास्ता खुलता है।
पत्र के अनुसार, इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले शिक्षकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), रायपुर द्वारा प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इससे परीक्षा आयोजन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया के संबंध में भी महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं।
अब परीक्षा की तारीख और विस्तृत आदेश का इंतजार
शासन की सहमति से विभागीय टीईटी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता की विस्तृत शर्तों और अन्य क्रियान्वयन संबंधी बिंदुओं पर संबंधित विभाग के आगामी आदेशों का इंतजार रहेगा। इसलिए शिक्षकों के लिए यह समझना जरूरी है कि वर्तमान पत्र परीक्षा आयोजन के प्रस्ताव पर शासन की सहमति को दर्शाता है; इसे परीक्षा की तारीख घोषित होने या सभी सेवा संबंधी समस्याओं के अंतिम समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
शिक्षकों के संघर्ष को मिली नई दिशा
विभागीय टीईटी पर शासन की सहमति से प्रदेश के सेवारत शिक्षकों में उम्मीद बढ़ी है। शिक्षक साझा मंच की लगातार सक्रियता ने इस मुद्दे को चर्चा से आगे बढ़ाकर शासन के निर्णय की प्रक्रिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे मंच के संघर्ष की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
अब शिक्षकों की अपेक्षा है कि शासन की सहमति के अनुरूप जल्द स्पष्ट आदेश जारी हो, परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया जाए और सेवारत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से लागू की जाए।
शिक्षक साझा मंच ने शिक्षक संवर्ग के प्रयास और एकता को इस निर्णय को हकदार बताया है—शिक्षकों की एकजुटता, निरंतर प्रयास और लोकतांत्रिक संघर्ष से महत्वपूर्ण मुद्दों पर समाधान की दिशा बन सकती है। विभागीय टीईटी पर शासन की सहमति इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। और साथ में यह संदेश देने का कोशिश किया है कि अगला हमारा मांग सहायक शिक्षक को वेतन विसंगती दूर करते हुए पूर्व सेवा गणना करते हुए कर्मोंनती और पेंशन जैसे समस्त लाभ के लिए शिक्षक संवर्ग को एकता के साथ आंदोलन के लिए तैयार रहे।


