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छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले आम नागरिकों को जल्द ही महंगाई का झटका लगने वाला है, क्योंकि राज्य में आगामी 23 सितंबर से बस की नई किराया दरें लागू होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
परिवहन और वित्त विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को विधि विभाग की मंजूरी का इंतजार है, जिसके तुरंत बाद इसे कैबिनेट की बैठक में अंतिम अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। नए प्रस्ताव के तहत सामान्य सीटिंग यात्री बसों का शुरुआती पांच किलोमीटर तक का किराया 12 रुपये तय किया गया है, जो पहले 10 रुपये था, और इसके बाद का किराया 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है जो कि पहले 1 रुपये प्रति किलोमीटर था।
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2018 के बाद से बस किराया नहीं बढ़ाया गया है, जबकि इस बीच डीजल की कीमत 92 रुपये से बढ़कर 110 रुपये प्रति लीटर हो गई है और ईरान युद्ध के बाद डीजल-ऑयल, ग्रीस, टायर-ट्यूब व अन्य सामानों के दाम भी बढ़ गए हैं। पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा ने भी डीजल के दाम बढ़ने पर बस किराया दो रुपये तक बढ़ाया है।
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किराए में होने वाली इस बढ़ोतरी को लेकर बस ऑपरेटरों के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं, जहां यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने मांग पूरी न होने पर 22 सितंबर से बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी दी है, वहीं ‘बस ओनर्स फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़’ ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप और अधिकारियों से मुलाकात कर शासन के सकारात्मक रुख की सराहना की है और इस हड़ताल का समर्थन करने से इंकार किया है।
इसके अलावा, बैठक के दौरान राज्य सरकार ने महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं जिसके तहत बस में पहली या अंतिम सवारी महिला होने पर वाहन की ऑनलाइन लाइव ट्रैकिंग अनिवार्य होगी तथा बसों में कैमरे और ट्रैकिंग डिवाइस हर समय सक्रिय रखने होंगे।























