राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मॉडल संस्थानों के रूप में विकसित,
नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम श्री) योजना ने अपनी प्रगति के अहम पड़ाव पार कर लिए हैं। योजना के तहत तय 14,500 मॉडल स्कूलों के लक्ष्य के मुकाबले जुलाई 2026 तक लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा करते हुए 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों का चयन किया जा चुका है। 2022-23 से 2026-27 तक के लिए ₹27,360 करोड़ के कुल वित्तीय आवंटन वाली यह केंद्र-प्रायोजित योजना देश के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक, समावेशी और भविष्य के अनुरूप 21वीं सदी के कौशलों से लैस कर रही है।
बजट में 107% का इजाफा, केंद्र का हिस्सा ₹5,224 करोड़ पहुंचा
स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा संचालित इस पांच वर्षीय योजना में केंद्र की कुल हिस्सेदारी ₹18,128 करोड़ है। परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) द्वारा मंजूर किए गए खर्च में केंद्र का हिस्सा वर्ष 2023-24 में ₹2,520 करोड़ था, जो 2026-27 के लिए बढ़कर ₹5,224 करोड़ हो गया है। बजट में यह 107 प्रतिशत की वृद्धि स्कूलों के बुनियादी ढांचे, आधुनिक लैब और तकनीकी उन्नयन में बढ़ते निवेश को दर्शाती है।
देशभर के 725 जिलों में फैला नेटवर्क: केवी और नवोदय भी शामिल
योजना ने देश के 725 जिलों और 8,340 ब्लॉक/शहरी निकायों तक अपनी पहुंच बना ली है। चयनित 13,092 संस्थानों में हर स्तर के विद्यालय शामिल हैं:
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प्राइमरी व अपर प्राइमरी: 1,305 प्राथमिक और 3,102 उच्च प्राथमिक स्कूल।
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माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक: 3,141 माध्यमिक और 5,544 हायर सेकेंडरी स्कूल।
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विशेष संस्थान: 913 केंद्रीय विद्यालय (KVS), 620 जवाहर नवोदय विद्यालय (NVS), 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) और 4 एनसीईआरटी (NCERT) संचालित स्कूल।
कड़े मानकों पर ‘चैलेंज मोड’ से हुआ चयन
पीएम श्री स्कूलों का चयन एक पारदर्शी, त्रि-स्तरीय ‘चैलेंज मोड’ व्यवस्था के जरिए किया गया है:
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पहला चरण (MoU): राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र के साथ गुणवत्ता मानकों को लागू करने का समझौता किया।
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दूसरा चरण (पहचान): यू-डीआईएसई+ (UDISE+) डेटा के न्यूनतम मानकों के आधार पर पात्र स्कूलों की छंटनी हुई।
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तीसरा चरण (प्रतिस्पर्धा): चिन्हित स्कूलों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएम पोषण, पर्यावरण अनुकूल पहलों और शिक्षण परिणामों के आधार पर प्रतिस्पर्धा की। चयन के लिए ग्रामीण स्कूलों को न्यूनतम 60% और शहरी स्कूलों को न्यूनतम 70% अंक पाना अनिवार्य रखा गया।
छह स्तंभों पर आधारित मॉडल स्कूल: मातृभाषा और तकनीक का संगम
‘पीएम श्री’ स्कूल केवल नई इमारतें बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आसपास के सामान्य स्कूलों के लिए मार्गदर्शक संस्थान (मेंटर स्कूल) के रूप में काम कर रहे हैं:
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स्थानीय भाषा में पढ़ाई: बुनियादी कक्षाओं में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन स्कूलों में 9,152 क्षेत्रीय भाषा शिक्षक, 6,102 संस्कृत शिक्षक और 1,994 उर्दू शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं।
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स्मार्ट क्लास और स्टेम (STEM): स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल लर्निंग टूल्स और ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे छात्र रटने की जगह समझने और प्रयोग करने पर ध्यान दें।
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अनुभव आधारित शिक्षा: बस्ता-मुक्त दिन (Bag-free days), स्थानीय कारीगरों के साथ इंटर्नशिप और हस्तशिल्प प्रशिक्षण के जरिए छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है।
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शिक्षकों का प्रशिक्षण: संस्थागत नेतृत्व के लिए प्रति DIET ₹3 लाख और शिक्षकों के विशेष कौशल विकास के लिए प्रति शिक्षक ₹2,500 तक की वित्तीय सहायता देकर शिक्षण गुणवत्ता को सुधारा जा रहा है।























