जशपुर।
जशपुर जिले ने इस सर्द मौसम में एक बार फिर ठंड का नया चेहरा देखा है। बीते एक दशक में पहली बार न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस के आसपास तक लुढ़क गया। रात की नमी जमकर सुबह होते होते खेतों, घास और खुली जमीन पर सफेद परत के रूप में नजर आई। ओस इतनी सख्त हो गई कि कई इलाकों में वह बर्फ जैसी दिखने लगी।
सुबह के वक्त हालात यह रहे कि लोग देर तक रजाई कंबल से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। सूरज निकलने के बाद भी ठंडी हवाओं ने राहत नहीं दी। दिन भर गलन बनी रही और शाम ढलते ही ठंड ने फिर से पकड़ मजबूत कर ली।
दशक भर में टूटा ठंड का पैमाना
पिछले दस वर्षों के मौसम रिकॉर्ड बताते हैं कि जशपुर में ठंड जरूर पड़ी लेकिन तापमान आमतौर पर दो से पांच डिग्री के बीच ही रहा। इस बार का शून्य के करीब पहुंचा पारा असामान्य माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे उत्तर भारत से आ रही शुष्क और ठंडी हवाओं का असर मान रहे हैं।
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खेतों में पाले की मार का डर
तेज ठंड से किसान भी चिंतित हैं। सब्जी और दलहन फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है। कई जगह किसान रात में खेतों के किनारे आग और धुआं कर फसलों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में पशुओं को खुले में छोड़ना मुश्किल हो गया है।
अलाव और सन्नाटा
ठंड बढ़ते ही गांव और कस्बों में अलाव जलते नजर आ रहे हैं। शाम 5 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगता है। बाजार जल्दी सिमट जाते हैं और लोग जरूरी काम न होने पर बाहर निकलने से बच रहे हैं।
बच्चे बुजुर्ग ज्यादा परेशान
कड़ाके की ठंड का असर सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों पर दिख रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को सुबह भारी परेशानी हो रही है। बुजुर्गों में सर्दी से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अभी ठंड का असर बना रहेगा
मौसम के संकेत बताते हैं कि अगले कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रह सकता है। न्यूनतम तापमान में फिलहाल खास बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।
दस साल बाद आई इस कड़क सर्दी ने जशपुर को पूरी तरह जकड़ लिया है। जमी ओस की सफेदी और शून्य के करीब पहुंचा पारा इस बात का सबूत है कि इस बार ठंड अपने पूरे तेवर में है।

