निलंबन का ‘शॉर्टकट’ बंद: मनचाही पोस्टिंग के चक्कर में ज्वाइनिंग रोकने वाले शिक्षकों पर DPI का हंटर, सीधे ‘ब्लैक ज़ोन’ में होगी तैनाती
**जशपुरनगर।**
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले जशपुर जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कलेक्टरेट सभाकक्ष में आयोजित निजी स्कूल संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक में दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में किसी भी स्थिति में जीर्ण-शीर्ण अथवा जर्जर भवनों में विद्यालयों का संचालन नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए उन्होंने स्कूलों के आसपास के 500 मीटर के दायरे को पूरी तरह ‘नो-ड्रग जोन’ घोषित कर दिया है। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से कड़े कदम उठाने की बात कही।
नए सत्र से पहले स्कूलों में बनेगा ‘रोड सेफ्टी क्लब’
कलेक्टर श्री व्यास ने सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और बच्चों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने सभी निजी स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अनिवार्य रूप से ‘रोड सेफ्टी क्लब’ का गठन करने के निर्देश दिए हैं। इस क्लब के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। स्कूल स्तर पर सिर्फ नियमों की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि भाषण, निबंध, पेंटिंग प्रतियोगिताओं और एक्सपोजर विजिट के माध्यम से बच्चों को व्यवहारिक रूप से जागरूक किया जाएगा। कलेक्टर ने साफ कहा कि शिक्षक और स्टाफ भी अनिवार्य रूप से हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करें ताकि वे बच्चों के लिए एक रोल मॉडल बन सकें।
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बिना लाइसेंस या हेलमेट के स्कूल आने पर पालकों और प्रबंधन पर गिरेगी गाज
यातायात नियमों के उल्लंघन को लेकर इस बार प्रशासन बेहद सख्त रवैया अपनाने जा रहा है। कलेक्टर ने स्कूल संचालकों को सचेत करते हुए कहा कि यदि कोई भी छात्र बिना ड्राइविंग लाइसेंस अथवा बिना हेलमेट के वाहन चलाते हुए विद्यालय आता पाया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और छात्र के माता-पिता (पालक) जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि वे शिक्षक-पालक बैठक (PTA) के माध्यम से अभिभावकों को भी इस नियम के प्रति कड़ाई से अवगत कराएं ताकि कम उम्र के बच्चों को वाहन देने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।
स्कूलों की बाउंड्री से 100 मीटर तक तंबाकू बैन, नियमित होगी जांच
विद्यार्थियों को नशे के जाल से दूर रखने के लिए प्रशासन ने स्कूलों के आसपास के व्यापारिक तंत्र पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। नए आदेश के मुताबिक, किसी भी विद्यालय की बाउंड्रीवाल से 100 मीटर की परिधि में सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा 500 मीटर के पूरे क्षेत्र को नो-ड्रग जोन माना जाएगा, जहां किसी भी प्रकार की संदिग्ध या नशीली गतिविधि पाए जाने पर तत्काल गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई होगी। कलेक्टर ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए हैं कि वे पुलिस के साथ मिलकर इन क्षेत्रों की नियमित और औचक जांच करें।
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इसके साथ ही उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी नशे की हालत में स्कूल आता है, तो प्रबंधन इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दे। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत बेहतरीन काम करने वाले और आधिकारिक वेबसाइट पर सर्वाधिक डिजिटल सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले स्कूलों को प्रशासन द्वारा सम्मानित भी किया जाएगा।
15 जून से पहले बसों का फिटनेस और स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य
छात्रों के सुरक्षित परिवहन को लेकर स्कूल संचालकों को समय-सीमा के भीतर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि 15 जून से पूर्व सभी स्कूल बसों का अनिवार्य रूप से फिटनेस परीक्षण करा लिया जाए और बसों के भीतर फर्स्ट एड किट एवं आपातकालीन सुरक्षा नंबरों का प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही सभी चालकों और हेल्परों का पुलिस सत्यापन (वेरिफिकेशन) भी 15 जून तक पूरा होना चाहिए। बच्चों को लाने-ले जाने वाले निजी वाहनों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। यदि कोई भी वाहन बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन के बच्चों का परिवहन करते पाया गया, तो उसे सीधे जब्त कर लिया जाएगा। ऐसे सभी कमर्शियल वाहनों पर ‘स्कूल वाहन’ का लोगो लगाना और उनके चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन होना भी अनिवार्य रहेगा।
परिसर में सीसीटीवी और बुनियादी सुविधाएं न होने पर होगी कार्रवाई
सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए जिले के सभी स्कूल परिसरों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, कलेक्टर ने छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पूरे परिसर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने को कहा है। बैठक के अंत में कलेक्टर ने उन निजी विद्यालयों को कड़ी हिदायत दी, जिनका इस वर्ष का बोर्ड परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के साथ-साथ स्कूलों को अपने शैक्षणिक स्तर में भी सुधार लाना होगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला परिवहन अधिकारी श्री अरविंद भगत, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री धर्मेंद्र साहू सहित जिले के सभी निजी स्कूलों के संचालक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

