नई दिल्ली
गगनयान मिशन समेत भारत के कई अहम स्पेस प्रोजेक्ट्स के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसे देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने एक बेहद सख्त और नया निर्देश जारी कर दिया है। अब गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी और हर मामले में अंतिम फैसला सीधे अंतरिक्ष विभाग करेगा।
हाल के वर्षों में इसरो के 100 से अधिक अनुभवी वैज्ञानिक और इंजीनियर संगठन छोड़ चुके हैं, जिससे राष्ट्रीय महत्व के मिशनों के समय पर पूरा होने पर असर पड़ने की आशंका है।
केंद्र निदेशकों से छीना अधिकार, अंतिम फैसले के लिए दिल्ली भेजा जाएगा मामला
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष विभाग द्वारा 14 जुलाई को इसरो के प्रमुख केंद्रों को एक आधिकारिक मेमोरेंडम जारी किया गया है।सरकार ने वर्ष 2020 में दी गई उस प्रशासनिक छूट को प्रभावी रूप से वापस ले लिया है, जिसके तहत कई मामलों में केंद्र निदेशक स्वयं इस्तीफे स्वीकार कर सकते थे。 नए निर्देशों के तहत, अब ‘ग्रुप A’ के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या वीआरएस के अनुरोधों को स्थानीय स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी मामलों को संबंधित केंद्र के निदेशक की सिफारिश के साथ अंतिम निर्णय के लिए अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) भेजा जाएगा।
इन प्रमुख केंद्रों पर लागू होगा आदेश: यह निर्देश विशेष रूप से यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC), विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) जैसे केंद्रों के लिए जारी किया गया है।
प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स बने वैज्ञानिकों की नई पसंद: VSSC के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी शामिल
इसरो से वैज्ञानिकों के पलायन की सबसे बड़ी वजह देश में तेजी से उभर रहा निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Private Space Sector) है। हाल ही में नौकरी छोड़ने वाले 100 से ज्यादा कर्मचारियों में बेंगलुरु स्थित URSC और तिरुवनंतपुरम स्थित VSSC से सबसे ज्यादा लोग शामिल हैं।
नौकरी छोड़ने वाले प्रमुख चेहरों में सीनियर साइंटिस्ट विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे वीएसएससी (VSSC) में देश के सबसे भारी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल Mk III (LVM-3) प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे।
क्यों छोड़ रहे हैं वैज्ञानिक?
| सरकारी नीति | स्पेस सेक्टर में बदलाव | वैज्ञानिकों पर असर |
| प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ते खुले (2020) | निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिली। | इसरो के अनुभवी वैज्ञानिकों के लिए निजी क्षेत्र में आकर्षक अवसर पैदा हुए। |
| भारतीय अंतरिक्ष नीति (2023) | ‘इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023’ लॉन्च होने से नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिला। | पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां तेजी से उभरीं। |
अंतरिक्ष विभाग ने अपने आदेश में साफ तौर पर माना है कि हाल के समय में वैज्ञानिकों के इस्तीफों और वीआरएस के मामलों में आई तेजी से ‘गगनयान’ जैसे प्रतिष्ठित मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और अन्य ‘क्रिटिकल मिशनों’ के क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि मिशन को बिना किसी रुकावट के तय समय पर पूरा करने के लिए सरकार को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है।

