CG Education Department: छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त तक पूरी होगी पदोन्नति प्रक्रिया, DPI ने सभी जिलों को जारी किए कड़े निर्देश
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने राज्य की प्राकृतिक आपदा राहत नीति को लेकर एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कानूनी स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के दौरान पेड़ से गिरने के कारण होती है, तो उसे हर हाल में प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) से हुई मृत्यु ही माना जाएगा। हाईकोर्ट ने इस मामले में राजस्व विभाग (Revenue Department) द्वारा मृतक के परिवार को मुआवजा देने से इनकार करने वाले अतिरिक्त कलेक्टर के पुराने आदेश को पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर दिया है। इसके साथ ही माननीय कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश जारी किया है कि आगामी 30 दिनों के भीतर मृतक के पीड़ित परिजन को 4 लाख रुपये की सहायता राशि का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।
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इस पूरे मामले के बैकग्राउंड को समझें तो यह घटना राजनांदगांव जिले के मोहला क्षेत्र की है। वहां 16 जुलाई 2020 को श्यामूराम मंडावी नाम के एक व्यक्ति लाख (Lac) निकालने के लिए पेड़ पर चढ़े हुए थे। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और बेहद तेज आंधी के साथ भारी बारिश शुरू हो गई, जिसके चलते संतुलन बिगड़ने से वह पेड़ से सीधे नीचे गिर गए। सिर और शरीर में गंभीर चोटें लगने के कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा, जांच और पोस्टमार्टम (Post Mortem) सहित सभी आवश्यक सरकारी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की थीं। इसके बाद मृतक के बेटे अमर सिंह ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत मिलने वाले 4 लाख रुपये के मुआवजे के लिए बकायदा आवेदन दिया था। स्थानीय नायब तहसीलदार ने सभी जांच रिपोर्टों और दस्तावेजों को सही पाते हुए मुआवजा देने की मजबूत अनुशंसा (Recommendation) भी की थी, लेकिन प्रशासनिक लेटलतीफी और संवेदनहीनता के चलते अतिरिक्त कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को यह अजीब तर्क देते हुए दावा खारिज कर दिया था कि पेड़ से गिरकर हुई मौत इस सरकारी योजना के दायरे में नहीं आती है।
प्रशासन के इसी गलत फैसले के खिलाफ परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष 9 जून 2015 के राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) की धारा-6 का खास तौर पर हवाला दिया गया। इस सरकारी नियम में साफ लिखा है कि आंधी-तूफान, अतिवृष्टि (Heavy Rainfall) या बाढ़ जैसी भयंकर परिस्थितियों में पेड़ या उसकी डाल गिरने, अथवा ऐसी विकट परिस्थितियों के कारण हुई किसी भी मृत्यु को दैवीय या प्राकृतिक आपदा माना जाएगा। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि श्यामूराम मंडावी की मौत भी उसी आंधी-तूफान के दौरान पेड़ से गिरने के कारण हुई थी, इसलिए यह मामला पूरी तरह से प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आता है। इसी के तहत हाईकोर्ट ने अतिरिक्त कलेक्टर के पुराने आदेश को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता अमर सिंह को 30 दिन के भीतर 4 लाख रुपये का मुआवजा जारी करने का अंतिम आदेश सुनाकर पीड़ित परिवार को एक बड़ा न्याय दिया है।

