रायपुर
जशपुर के छोटे से गांव गुइटांगर से निकलकर ग्लासगो के अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक पहुँचना अनिमेष कुजूर के जुनून की एक अनोखी मिसाल है। छत्तीसगढ़ के इस उबलते हुए सितारे ने राष्ट्रमंडल खेलों में डेब्यू करते ही 200 मीटर दौड़ को महज 20.46 सेकंड में पूरा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। सभी हीट्स को मिलाकर उनका यह समय सातवां सबसे तेज रहा, जिससे अब पूरे देश की उम्मीदें उन पर टिक गई हैं।
अनिमेष के पिता अमृत कुजूर अंबिकापुर में और मां रीना कुजूर सूरजपुर में डीएसपी के पद पर सेवा दे रहे हैं। शुरुआत में अनिमेष की रुचि फुटबॉल खेलने में थी, लेकिन कोरोना काल के बाद उनका रुझान एथलेटिक्स की तरफ बढ़ा। बिना किसी बड़ी कोचिंग के अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने साल 2022 में बिलासपुर में आयोजित अंडर-23 नेशनल प्रतियोगिता में पहला गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2023 में वे रिलायंस फाउंडेशन से जुड़े और आज 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी हैं। हाल ही में जर्मनी की 100 मीटर दौड़ को 10.14 सेकंड में पूरा करके वे विदेशी जमीन पर सबसे तेज दौड़ने वाले भारतीय भी बने थे।
उनकी इस पूरी यात्रा में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के दिनों का एक वाकया सबसे अहम रहा। एक दिन शाम को मेस से लौटते समय धीरे चल रहे अनिमेष को उनके हाउस मास्टर सौरभ जैन ने टोकते हुए कहा था कि तुम केवल चल नहीं, बल्कि दौड़ भी सकते हो। बस मास्टर साहब की यही बात अनिमेष के दिल में उतर गई और उन्होंने दौड़ने को ही अपना लक्ष्य बना लिया।
अनिमेष की इस शानदार सफलता की गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम तक भी पहुंची थी, जहां प्रधानमंत्री ने उनसे बात कर उनका हौसला बढ़ाया था। आज जशपुर का यह लाल न केवल सरगुजा संभाग के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुका है, बल्कि ग्लासगो में भारत का तिरंगा लहराने के बेहद करीब खड़ा है।

