सड़कों पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और तेज रफ्तार की वजह से होने वाले हादसों पर रोक लगाने के लिए यातायात पुलिस ने ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों पर नकेल कसी है। पुलिस ने क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि डिलीवरी कर्मियों पर 10 से 15 मिनट के भीतर पार्सल पहुंचाने का दबाव बनाना तुरंत बंद किया जाए और उन्हें इस समय-सीमा की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। इसके साथ ही, आम जनता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के मद्देनजर सभी डिलीवरी बॉयज का पुलिस चरित्र सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
पुलिस उपायुक्त (यातायात एवं प्रोटोकॉल) डॉ. अर्चना झा की अध्यक्षता में शनिवार को विभिन्न डिलीवरी कंपनियों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में ब्लिंकिट, फ्लिपकार्ट, ब्लू डार्ट और डिलीवरी डॉट कॉम जैसी कंपनियों के संचालक और प्रबंधक शामिल हुए। चर्चा के दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राम कुमार बर्मन, सहायक पुलिस आयुक्त सतीश ठाकुर और रमेश येरेवार भी उपस्थित रहे।
बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर कंपनियों की जवाबदेही तय की गई। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों तक चंद मिनटों में सामान पहुंचाने की होड़ खत्म होनी चाहिए, ताकि डिलीवरी एजेंट्स हड़बड़ी में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में न डालें। इसके अलावा बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलने, ओवरस्पीडिंग और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने यह भी साफ कर दिया है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों पर पुलिसिया चालान के साथ-साथ संबंधित कंपनियों को भी अपने स्तर पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी होगी। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए कंपनियों को अपने सभी फील्ड स्टाफ का स्थानीय थानों से अनिवार्य सत्यापन कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है।























