कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी युद्ध को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक लेख में आरोप लगाया कि भारत सरकार ने गाजा संकट पर “चुप्पी और निष्क्रियता” अपनाई है, जो न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि देश के राष्ट्रीय हितों के भी खिलाफ है।
सोनिया गांधी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किया गया हमला पूरी तरह अस्वीकार्य और निंदनीय था, लेकिन इसके बाद गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई “क्रूरता और बर्बरता” का रूप ले चुकी है।
बच्चों को निशाना बनाए जाने का आरोप
अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बच्चों को निशाना बनाना कोई संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के व्यापक विनाश पर भी चिंता जताई।
भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भारत, जो कभी फिलिस्तीन के समर्थन और वैश्विक शांति की नीति के लिए जाना जाता था, आज गाजा मुद्दे पर “चुप्पी साधने वाला अकेला देश” बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की यह नीति भारत के ऐतिहासिक सहयोगियों फिलिस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों से दूरी बढ़ा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस रुख का लाभ पाकिस्तान को मिल रहा है, जो खुद आतंकवाद के आरोपों का सामना करता रहा है, लेकिन अब क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
‘मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती के अलावा कुछ नहीं मिला’
सोनिया गांधी ने अपने लेख में लिखा कि भारत ने अपनी रणनीतिक और नैतिक स्थिति से समझौता किया, लेकिन बदले में देश को “सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दोस्ती” ही हासिल हुई। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की नीतियों की दुनिया के कई देशों में आलोचना हो रही है।
अमेरिका और इजरायल पर भी निशाना
कांग्रेस नेता ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन के समर्थन ने इजरायल को गाजा में सैन्य अभियान जारी रखने का अवसर दिया। उन्होंने दावा किया कि कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी गाजा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई है।
कांग्रेस नेताओं का समर्थन
सोनिया गांधी के इस लेख का कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने समर्थन किया। खड़गे ने इसे भारत की वर्तमान विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाने वाला लेख बताया, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और मानवीय मूल्यों के साथ खड़ा होना चाहिए।

