नई दिल्ली |
सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य किसी सरकारी या उपक्रम कर्मचारी की असमय मृत्यु के बाद उसके परिवार को तत्काल वित्तीय संकट से उभारना है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जोर देकर कहा कि ऐसी कल्याणकारी योजनाओं की व्याख्या निष्पक्ष, व्यावहारिक और तार्किक तरीके से की जानी चाहिए, ताकि नीति का मूल उद्देश्य विफल न हो।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Western Coalfields Ltd.) के एक कर्मचारी के परिवार से जुड़ा है: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में डोजर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी की 17 दिसंबर 2020 को सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। पिता की मृत्यु के समय बेटे की उम्र 34 वर्ष, 10 महीने और 12 दिन थी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स ने नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट-6 (National Coal Wage Agreement-VI) के खंड 9.3.4 का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि प्रक्रिया पूरी होने तक याचिकाकर्ता 35 वर्ष की निर्धारित आयु सीमा पार कर चुका था।
पीठ ने कंपनी के रवैये और तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करने के निर्णय को गलत माना, शीर्ष अदालत ने बेटे द्वारा दायर याचिका को मंजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजनाओं का उद्देश्य परिवारों को राहत देना है, न कि प्रशासनिक देरी या नियमों के कड़े तकनीकी अर्थ निकालकर उन्हें राहत से वंचित करना।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देशभर के उन आश्रितों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके अनुकंपा नियुक्ति के दावे केवल प्रशासनिक देरी या मामूली आयु संबंधी तकनीकी कारणों से अटका दिए जाते हैं।























