रायपुर, 16 मई।
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके पतियों या रिश्तेदारों द्वारा सरकार चलाने की ‘प्रॉक्सी’ (पति-प्रतिनिधि) संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब ग्राम पंचायत, जनपद और जिला पंचायत की बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। उनके स्थान पर किसी भी रिश्तेदार, पति या प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डिजिटल तकनीक से थमेगा ‘फर्जीवाड़ा’
बैठकों में महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभाग अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेगा। आदेश के मुताबिक:
- आवश्यकता पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन (चेहरा पहचानना) और बायोमीट्रिक अटेंडेंस प्रणाली के जरिए महिलाओं की उपस्थिति का सत्यापन किया जाएगा।
- पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैठकों और ग्राम सभाओं की पूरी कार्यवाही को ‘सभासार पोर्टल’ और ‘निर्णय ऐप’ जैसे अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
पेसा क्षेत्रों में ‘महिला सभा’ अनिवार्य, मिलेगी लीडरशिप ट्रेनिंग
महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिलों में जेंडर सेंसिटाइजेशन (लिंग संवेदीकरण) कार्यक्रम और नेतृत्व विकास प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही, पेसा (PESA) कानून के अंतर्गत आने वाले आदिवासी क्षेत्रों की पंचायतों में मुख्य ग्राम सभा से पहले ‘महिला सभा’ का आयोजन करना अनिवार्य कर दिया गया है। सामान्य क्षेत्रों में भी ऐसी महिला सभाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सकें।
प्रॉक्सी राज की शिकायत के लिए लगेगी ‘शिकायत पेटी’
यदि किसी पंचायत में अब भी महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पुरुष रिश्तेदार काम करते पाए जाते हैं, तो इसकी शिकायत के लिए जिला, जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिकायत पेटियां लगाई जाएंगी। विभाग ने एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निपटारा करना होगा।
अफसरों की तय होगी जवाबदेही, हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
शासन ने इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी सीधे प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी है। सभी संबंधित अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन करने और इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लेने को कहा गया है। आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर अधिकारियों को पहली पालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) सौंपनी होगी, जिसके बाद हर महीने की 5 तारीख तक नियमित प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजना अनिवार्य होगा। बेहतर काम करने वाली महिला जनप्रतिनिधियों की ‘सफलता की कहानियों’ को सोशल मीडिया पर प्रचारित भी किया जाएगा ताकि अन्य महिलाएं प्रेरित हो सकें।

