नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में गुरुवार की आधी रात एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ लेकर आई। जब संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और आरक्षण पर तीखी बहस जारी थी, उसी दौरान केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एक सनसनीखेज नोटिफिकेशन जारी कर पूरे देश को हैरान कर दिया। इस नोटिफिकेशन के साथ ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है।
16 अप्रैल 2026 से कानून प्रभावी, सस्पेंस खत्म
कानून मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू माने जाएंगे। हालांकि यह बिल सितंबर 2023 में ही पारित हो गया था, लेकिन इसके लागू होने की सटीक तारीख पर सस्पेंस बना हुआ था। अब सरकार ने इसे कानूनी रूप से सक्रिय कर दिया है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी का रास्ता साफ हो गया है।
850 सीटों वाली नई लोकसभा और नारी शक्ति
इस कानून के लागू होने के बाद वर्ष 2029 की विधायी तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी:
-
लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 तक की जा सकती हैं।
-
नई व्यवस्था के तहत कम से कम 270 से अधिक महिला सांसद संसद पहुंचेंगी।
-
राज्यों की विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
-
यह आरक्षण अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर पूर्ण रूप से प्रभावी होगा।
प्रियंका गांधी का हमला: “इसमें राजनीति की बू आती है”
सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे ‘राजनीतिक खेल’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों की फेरबदल की बातें की जा रही हैं, उसमें गहराई से देखने पर राजनीति की बू आती है। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाएं अब बहकावे में आने वाली नहीं हैं।
शुक्रवार शाम 4 बजे होगी वोटिंग
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की है कि इन विधेयकों पर शुक्रवार शाम 4 बजे वोटिंग होगी। उन्होंने सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की अपील की है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारतीय राज्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए आश्वासन दिया कि सीटों का समायोजन पूरी तरह पारदर्शी होगा और किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा।

